Saturday, September 7, 2024

अमिताभ बच्चन: संघर्ष, उठान, और एक अद्वितीय वापसी की कहानी

**
1988 का साल भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन के लिए एक ऐसा मोड़ साबित हुआ, जिसे कोई भी भूल नहीं सकता। उस साल आई उनकी फिल्म "गंगा जमुना सरस्वती" बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इस घटना ने न केवल अमिताभ की सुपरस्टार की छवि को झटका दिया, बल्कि यह उनके करियर के सबसे कठिन दौर की शुरुआत भी थी। उस समय, "द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया" ने उनके बारे में एक कवर स्टोरी छापी जिसका शीर्षक था "FINISHED"—यानि कि "ख़त्म।"

जिस अमिताभ को लोग सुपरस्टार कहते थे, उसके लिए अब मुसीबतें सिर पर मंडराने लगी थीं। 1988 से 2000 तक, 90% से अधिक उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। लेकिन अमिताभ के संघर्ष की कहानी यहीं से शुरू होती है। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि उस कठिन समय में भी अपनी हिम्मत बनाए रखी।

1995 में, अमिताभ ने अपना प्रोडक्शन हाउस ABCL (अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) लॉन्च किया। सभी को उम्मीद थी कि यह कंपनी अमिताभ के करियर को एक नई दिशा देगी। लेकिन किस्मत ने फिर से उनकी परीक्षा ली। ABCL जल्द ही कर्ज़ में डूब गई, और अमिताभ का दिवालिया होना तय हो गया। उनके ऊपर करोड़ों का कर्ज़ चढ़ गया, और उनके पास इसे चुकाने का कोई उपाय नहीं था।

इस कठिन समय में, एक घटना ने अमिताभ के मानवीय पहलू को उजागर किया। अभिनेता अंजन श्रीवास्तव, जो कि एक बैंक में कार्यरत थे, ने बताया कि कैसे अमिताभ अपने कर्ज़ को चुकाने के लिए कैनरा बैंक के मैनेजर के सामने हाथ जोड़कर वादा कर रहे थे। उनके इस विनम्रता भरे कदम ने सभी का दिल जीत लिया। 

धीरूभाई अंबानी ने जब अमिताभ के कर्ज़ के बारे में सुना, तो उन्होंने अपने बेटे अनिल अंबानी को अमिताभ की मदद के लिए भेजा। लेकिन अमिताभ ने इस सहायता को विनम्रता से ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि वह खुद ही अपने कर्ज़ को चुकाएंगे। इस घटना ने दिखा दिया कि अमिताभ न केवल एक महान अभिनेता हैं, बल्कि एक महान इंसान भी हैं।

फिर आया साल 2000, और अमिताभ के करियर का सबसे बड़ा मोड़। "कौन बनेगा करोड़पति" (KBC) टीवी शो ने उनके करियर को एक नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया। इस शो ने न केवल अमिताभ को टीवी के सबसे बड़े स्टार के रूप में स्थापित किया, बल्कि उन्होंने भारतीय टीवी इंडस्ट्री को भी एक नई दिशा दी। पहले सीजन में ही 2.7 करोड़ लोग KBC देखने के लिए टीवी से चिपके रहते थे। यह शो इतनी बड़ी हिट साबित हुआ कि अमिताभ फिर से एक बार घर-घर में लोकप्रिय हो गए।

KBC की सफलता के बाद, अमिताभ के जीवन में एक नया दौर शुरू हुआ। ब्रांड एंडोर्समेंट्स की लाइन लग गई, और वह UpGrad, कैडबरी, पार्कर पेंस, और गुजरात टूरिज्म जैसे प्रमुख ब्रांडों के चेहरे बन गए। केवल विज्ञापनों से ही वह सालाना 50-60 करोड़ रुपये कमाने लगे। सोशल मीडिया के दौर में भी उन्होंने तेजी से कदम रखा, और आज उनके ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म्स पर 100 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

हाल ही में, हुरुन की रिपोर्ट में भारत के सबसे अमीर HNIs (हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स) की सूची में अमिताभ का नाम शामिल किया गया है, जिसमें उनकी संपत्ति 1600 करोड़ रुपये आंकी गई है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी संपत्ति 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह वही अमिताभ हैं जिन्होंने 1988 में ज़ीरो से शुरूआत की थी और 24 साल में 3000 करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर दी।

तो क्या हुआ उन लोगों का जो अमिताभ के पतन की भविष्यवाणी कर रहे थे? "Finished" स्टोरी के पांच साल बाद, "द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया" बंद हो गई। इसके अधिकतर संपादक अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन किस्मत का खेल देखिए, 2002 में पूर्व संपादक प्रीतिश नंदी ने अमिताभ के साथ फिल्म "कांटे" का निर्माण किया, जो उनके करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। यह अमिताभ के लिए एक प्रतीकात्मक जीत थी, जो दिखाती है कि शब्दों की जगह काम बोलता है।

धीरूभाई अंबानी ने एक बार सार्वजनिक रूप से कहा था, "ये लड़का गिर गया था, लेकिन अपने बल पर फिर खड़ा हो गया, मैं इसकी इज्जत करता हूं।" अमिताभ बच्चन केवल एक रील-लाइफ सुपरस्टार नहीं हैं; वह एक वास्तविक जीवन के योद्धा हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के सामने चट्टान की तरह खड़े होकर जीत हासिल की। इसमें उन्हें 15 साल लगे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

अगर किसी इंसान ने इस लाइन को सही साबित किया है, "हम जहां खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है," तो वह अमिताभ बच्चन हैं। वह एक इंसान हैं जो न केवल फिल्मों में, बल्कि वास्तविक जीवन में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

No comments: