**बारिश की मार**
भारी बारिश के बीच, एक टूटी-फूटी मिट्टी की झोपड़ी में एक गर्भवती महिला लेटी थी। उसकी आँखें बंद थीं, चेहरा थका हुआ था, और वह अपने भीतर पल रहे जीवन के बारे में सोच रही थी। उसके चारों ओर बिखरी गरीबी और उसके भीतर पल रहे दर्द ने उसकी सांसें धीमी कर दी थीं। उसकी छत जगह-जगह से टपक रही थी, पर उस छत के नीचे उसकी दुनिया थी—उसके दो छोटे बच्चे। 🌧️
एक बच्चा, जो उसकी गोद से लिपटकर रो रहा था, मानो उसकी भूख और ठंड को मां की ममता ही मिटा सकती थी। उसके आँसू, बारिश की बूंदों में मिलकर बहने लगे थे। उसकी मासूमियत के सामने यह दुनिया कितनी बड़ी और बेरहम लग रही थी।
दूसरी तरफ उसका छोटा भाई, कीचड़ में लेटा, बारिश की बूंदों से खेल रहा था। वह अपनी ही दुनिया में मग्न था, बेपरवाह इस बात से कि उसकी माँ के आँचल में कितने आँसू छुपे हुए हैं। उसकी हंसी में एक मासूमियत थी जो मानो उस गरीबी को भी अनदेखा कर रही थी। 🌈
माँ की आँखों में गहरी उदासी थी, पर उसके दिल में अपने बच्चों के लिए अनकहा प्यार। वह थकी थी, टूटी थी, पर वह उम्मीद नहीं छोड़ सकती थी। उसकी ममता की बारिश में उसके बच्चों के लिए छांव थी, और इसी छांव में उसने अपने सारे दुख छुपा लिए थे। 💔
यह बारिश सिर्फ बाहर नहीं हो रही थी, यह उसके दिल में भी हो रही थी। वह जानती थी कि आने वाले दिन और भी कठिन हो सकते हैं, पर वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए लड़ती रहेगी। यह उसकी दुनिया थी—गरीबी की, संघर्ष की, लेकिन सबसे ऊपर ममता की।
बारिश की हर बूंद जैसे उसकी कहानी सुना रही थी, एक ऐसी कहानी जिसमें आँसू, हंसी, संघर्ष, और प्यार का मेल था। 🥺💧
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