Thursday, September 19, 2024

शकुंतला देवी: जीवन संघर्ष और सेवा का प्रतीक


जमुई काला । कल शाम को शकुंतला देवी का निधन हो गया। वे लगभग 50 साल की थीं और उनकी मृत्यु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हुई। यह खबर सुनकर पूरे Kala Panchayat में शोक की लहर दौड़ गई। शकुंतला देवी का जीवन एक संघर्ष की कहानी रहा है, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपने जीवन में वे हमेशा मेहनत और लगन से काम करती रहीं। वे एक देहाड़ी मजदूर थीं और अपने रोजमर्रा के काम के साथ-साथ अपने आस-पास के लोगों की भी मदद करती थीं।

युवावस्था में शकुंतला देवी ने अपने काम के प्रति समर्पण और मेहनत से पहचान बनाई। वे नियमित रूप से मेहनत करतीं और कभी भी किसी मदद की उम्मीद नहीं करतीं थीं। जब भी किसी को मदद की जरूरत होती, वे आगे आकर सहयोग करतीं। Kala Panchayat में लोग उन्हें उनके इस सेवाभावी स्वभाव के लिए हमेशा याद करेंगे।

उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए। अपने लिए काम करने के साथ-साथ दूसरों की मदद करने का जो गुण शकुंतला देवी में था, वह आज के समय में दुर्लभ है। वे समाज के सबसे निचले तबके से थीं, लेकिन उनका दिल और हौसला हमेशा ऊँचा था।

शकुंतला देवी का निधन हमारे लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनका जीवन हमेशा हमें प्रेरणा देता रहेगा। उनकी यादें, उनका संघर्ष, और उनकी सेवा भाव हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

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