आज हमने "काला आहार" के "काकुर्या नाल को खोलने" का प्रयास किया, लेकिन इसमें हम पूरी तरह असफल रहे। इसका मुख्य कारण यह है कि बांध के आर-पार एक पुराना नाला दिया गया है, जो कई सालों से लोग जरूर के हिसाब से मिट्टी, पत्थर, और अन्य चीजों से बंद कर दिया जाता है, जब पानी का उपयोग नहीं होता है। इस नाले को बंद और खोलने की प्रक्रिया किसी आम किसान के लिए बहुत कठिन और खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि इसे बंद करने के लिए लगभग दस फीट गहरे पानी में उतरना पड़ता है। यह किसी की जान को जोखिम में डालने जैसा है, और यह व्यवस्था किसानों के लिए पूरी तरह से अव्यावहारिक है।
काला आहार के आसपास इस तरह के 4 से 5 नाले हैं, जो इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चार साल पहले, इस आहार की खुदाई और नालों से संबंधित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए लघु जल संसाधन विभाग, जमुई, बिहार के माध्यम से काम किया गया था। लेकिन यह काम भी सिर्फ आधा-अधूरा रह गया है। अगर इन नालों पर हाइड्रोलिक या किसी और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके पानी रोकने और छोड़ने की उचित व्यवस्था की जाती, तो आज किसानों को इस प्रकार की समस्याओं से नहीं जूझना पड़ता।
काला आहार में पानी धरधररिया डेम से केनाल नंबर एक से आता है, लेकिन यह केनाल भी अपने कार्य में असफल साबित हो रहा है। वहीं, केनाल नंबर दो से जाने वाले आहार का पानी आज भी सूखा पड़ा है। यह स्थिति बताती है कि पूरा कार्य केवल कागजों पर किया गया है, जबकि जमीन पर कोई भी समाधान नहीं दिखाई देता। किसानों ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान कुछ भी नहीं।
इस बार हमने इस मुद्दे को और गहराई से समझने के लिए काला आहार से संबंधित एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया है। इस वीडियो में हमने विस्तार से बताया है कि किस तरह से इन नालों की खराब व्यवस्था ने किसानों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। आप इस वीडियो को देखें और खुद समझें कि किस तरह की समस्याओं से किसान रोजाना जूझ रहे हैं। वीडियो लिंक: YouTube links
समस्या की गंभीरता को देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग तुरंत इस मामले को संज्ञान में लें और इन नालों की व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएं। वरना, किसानों की हालत और बदतर हो सकती है, और उनके लिए अपनी फसल की सुरक्षा करना असंभव हो जाएगा।
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