जमुई काला पंचायत.धरधरिया नद्या: विप्लवः (धरधरिया नदी की विपत्ति)
त्राहि त्राहि शिव शम्भो! गम्भीरे जलप्रवाहे,
द्वितीय-पानं तु निरुद्धं, कृषकाः हताशाः स्थिता:॥
हे शिव शम्भु! गम्भीर जलप्रवाह में विघ्न उत्पन्न हो गया है, द्वितीय पैन से जल प्रवाह रुक गया है, और किसान आशा की किरण खो बैठे हैं।
शून्यं क्षेत्रं, शुष्कं धान्यं, भूमिः कृशा विलीनता,
जलं विना यत्नानां कृता व्यर्थता, नास्ति आश्रयता॥
खेत सूने पड़े हैं, धान की फसल सूख चुकी है, और भूमि की निराशाजनक स्थिति देखकर, जल के बिना किसानों की मेहनत व्यर्थ हो गई है।
शम्भो शिवाय शरणं, जलं कुरु कृपया,
सरकारस्य यन्त्राणि असमर्थानि, कृषकानां विपदाय॥
हे शिव, हमें शरण दो, कृपया जल की धारा बहाओ। सरकार की मशीनरी असफल हो रही है, और इसके कारण किसानों पर विपत्ति का दौर छा गया है।
सर्वं शून्यं, धरण्या: गर्भं शुष्कम्, अश्रुभिः सिञ्च्यते भूमिः,
इन्द्रभवने निर्दिष्टं, जलं न आगच्छति॥
धरती की कोख सूखी हुई है, अश्रुओं से भूमि को सींचने की कोशिश की जा रही है, इंद्र भवन से निर्देशित जल भी अब तक नहीं पहुँचा है।
सदा शिवाय ध्यायामः, करुणां कुरु भो शम्भो,
अधिकारिणां विक्षेपेण, कृषकाः दीनाः संस्थिता:॥
हम सदा शिव की आराधना करते हैं, कृपया करुणा करो, हे शम्भो। अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान दीन-हीन हो चुके हैं, तुम्हारी सहायता ही उनकी अंतिम आशा है।
हिन्दी अनुवाद (अर्थ):
धरधरिया नदी की विपत्ति में, द्वितीय पैन से पानी का प्रवाह रुक गया है। किसान निराश हो गए हैं और उनकी मेहनत बेकार हो रही है। खेत सूने और धान सूखे हुए हैं। शिव से प्रार्थना है कि वह जल का मार्ग प्रशस्त करें, क्योंकि सरकार और लघु जल संसाधन विभाग की मशीनरी विफल हो गई है। शिव ही अब किसानों की आशा हैं। इंद्र भवन से जल के आदेश के बावजूद पानी नहीं आ रहा है, और किसान अब शिव पर निर्भर हैं, क्योंकि सरकारी तंत्र की विफलता ने उन्हें संकट में डाल दिया है।
(यह समस्या बिहार सरकार के जमुई स्थित लघु जल संसाधन विभाग की लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है।)
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