जमुई काला पंचायत: पहले भी अतिक्रमण हुआ था, तो सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल मुखिया के जरिए हुआ? लघु जल संसाधन विभाग, जमुई ने बाकी हिस्सों की जांच क्यों नहीं की? यह देखना आवश्यक था कि कहीं सच में अतिक्रमण है या नहीं। लेकिन जब किसान अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, तो विभाग केवल अतिक्रमण का बहाना बनाकर उनकी शिकायतें खारिज कर देता है ।
कुछ साल पहले, किसानों ने पंचायत के मुखिया, रणधीर यादव पर अतिक्रमण का आरोप लगाया था। यह शिकायत उस समय की थी जब अधिकारियों ने जांच शुरू की, लेकिन उन्होंने बाकी पैन के हिस्से की जांच नहीं की। यदि जांच सही तरीके से की जाती, तो शायद पिछले शिकायतों में उठी समस्याएं हल हो सकती थीं , साथ ही शिकायत करता को
सक्षम न्यायालय में जाने के लिए सलाह दीया जाता है।
अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है। लघु जल संसाधन विभाग, जमुई, जिसने पैन (जलाशय) के पानी का प्रबंधन करना चाहिए था, अब खुद पूरे पैन के अधिकांश हिस्से पर अतिक्रमण का आरोप लगा रहा है। यह वही विभाग है, जो किसानों की मदद के लिए होना चाहिए, लेकिन अब वे अतिक्रमण के बहाने किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
जब भी कोई किसान अपनी शिकायत दर्ज करता है, तो विभाग अतिक्रमण या सक्षम न्यायालय का हवाला देकर उसे खारिज कर देता है। यह किसानों के लिए बेहद निराशाजनक है। उनकी ज़मीन और फसलें पूरी तरह से इस पानी पर निर्भर हैं। बिना पानी के खेती संभव नहीं है, और विभाग इस महत्वपूर्ण समस्या को हल करने के बजाय शिकायतों को टाल रहा है।
इस समस्या ने किसानों की आर्थिक और मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेती उनके जीवन का आधार है, लेकिन जब पानी ही उपलब्ध नहीं होगा, तो उनकी फसलें कैसे बचेंगी? लघु जल संसाधन विभाग द्वारा लगातार इस मुद्दे को टालने के कारण किसान बुरी तरह परेशान हैं।
हमने भी इस समस्या के संबंध में बिहार लोकशिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। हालाँकि, अब ऐसा लगता है कि वहाँ से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हमारी शिकायतें दूसरे विभागों के पास भेजी जा रही हैं, और समाधान नहीं निकल रहा है।
अब हमारी एकमात्र उम्मीद मानव अधिकार आयोग से है। हमने इस समस्या के समाधान के लिए वहां भी शिकायत दर्ज कराई है और आशा करते हैं कि वे किसानों की इस कठिनाई को समझें और उचित कार्रवाई करें। जब तक इस मामले का समाधान नहीं निकलेगा, काला पंचायत के किसान अपनी जिंदगी को भगवान भरोसे छोड़ने पर मजबूर होंगे।
हमारे दिल में बस यही सवाल है: क्या कोई सुनने वाला है? 🌾🙏
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