काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तहसील, जमुई जिला, बिहार के कहानी आजकल कवनो किस्सा ना, बल्कि एगो सच्चाई बन गइल बा। धरधरिया केनाल से निकलत दूसरा पैन के पानी जइसे रुई के फाहा हो गइल बा – देखे के बा, बाकिर पकड़े के नइखे। एह लापरवाही के चलते किसान लोगन के खेत में धान के बालि सूखत बा, आ पसीना से सिंचाई करत मेहनतगर हाथ आज बंजर भइल धरती के निहार रहल बा।
धरधरिया केनाल के सुनी पनियाही गीत
कभी धरधरिया केनाल से निकलत पानी के आवाज सुनाई देत रहल, बाकिर आजकल त उ गीत भी खामोश हो गइल बा। केनाल में पैन ना, किसान लोगन के आंख में आसूँ बा। एह ठनकते माटी के सीना पर हल चलावे वाला किसान अब आपन मेहनत के धूप में सूखत देखत बा। ओहनी के फसल के डाढ़ से पानी अब गायब हो गइल बा, आ ओकरा जगहे पर सूखा आ बदहाली के चादर फैल गइल बा।
सरकार के ध्यान में – "खाली हाथ तिरपाल पर"
सरकार आ जल संसाधन विभाग के लापरवाही त अब सबके सामने बा। कला पंचायत के किसानन के कवन भरोसा? जे अधिकारी लोगन से मिलल, ऊ कहले कि काम होई। बाकिर साल दर साल बीत गइल, पैन ना त केनाल में, ना खेत में। सइकिल पर चढ़के किसान लोग सरकारी दफ्तर के चक्कर लगावत बा, आ कागज पर आशा के पतंग उड़ावत बा। बाकिर पतंग के डोर उहे बा, जेकरा के थाम के पैन के बहाव चालू होखे।
"धरती मईया त भोली बा, बाकिर सरकार के कौन जगाई?"
धरधरिया केनाल से पानी ना बहे खातिर कवन कारण बा? किसान लोगन के हरिया बालि सूख के कवन जुर्म कइलस? का एही दिन देखे के रहे? जवन सरकार के भरोसा कइलस, ओह सरकार से पुछे के पड़ी कि कब अइबे करब पैन? ई माटी त बहुत दिन से इंतजार करत बिया, बाकिर अब त किसान लोग हार मानत बा।
"सपना बुनत किसान, आ सरकार के अधिकारी सोवत"
आजकल कला पंचायत के लोगन के एगो सपना बा – आकाश में बादर त बा, बाकिर खेत में पानी ना। जल संसाधन विभाग के काम देख के लागत बा कि अधिकारी लोग के नींद अब लेस के बाड़ल बा। पंचायत के लोग कहत बा कि हरियाली तब आइल, जब लघु जल संसाधन विभाग के होश आइल। बाकिर कब होई ई चमत्कार?
"काहे सुनत नइखीं हमार गोहार?"
सरकार से इहे निवेदन बा कि किसानन के करेजा पर हाथ राख के सोचीं। खेती उनका लेल रोजी-रोटी बा। बिना पानी के त किसान के जिनगी सूख गइल बा। जबले धरधरिया केनाल से पानी ना आवी, तबले किसान लोगन के दिन में भी अन्हार बा। कला पंचायत के किसान सरकार से इहे माँग करत बा कि एह जल संकट के जल्द से जल्द सुलझावल जाव, नइतर फसल के जगहे पर भूखल पेट आ निराशा के कहानी लिखाई।
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सरकार से गोहार बा कि जल संसाधन विभाग के ध्यान में एह बड़ समस्या के लावल जाव, ताकि किसानन के जिनगी में फिर से हरियाली आ सके।
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