Saturday, September 7, 2024

धरधरिया डेम से निकलने वाले दूसरे पैन की गलत निर्माण: किसानों के अधिकारों का उल्लंघन


धरधरिया डेम जमुई काला पंचायत से निकलने वाले दूसरे पैन की गलत निर्माण ने हमारे गाँव के किसानों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। इस पैन का निर्माण कार्य सही तरीके से नहीं किया गया, जिसके कारण पानी का उचित वितरण संभव नहीं हो पा रहा है। इस वजह से किसानों की फसलें सूख रही हैं, और उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ रहा है। यह केवल तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं है, बल्कि हमारे मौलिक अधिकारों का भी हनन है। 

भारत में कृषि की महत्वता निर्विवाद है। हमारे संविधान ने प्रत्येक नागरिक के जीवन, स्वतंत्रता, और गरिमा को संरक्षित करने के लिए कई अधिकार प्रदान किए हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है जीवन का अधिकार, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है। इस अधिकार का अर्थ केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है। किसानों के संदर्भ में, यह अधिकार उस समय चुनौतीपूर्ण हो जाता है जब उन्हें उनकी कृषि भूमि पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता।

धरधरिया केनाल के निर्माण में हुई त्रुटियों ने हमारे गाँव के किसानों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। यह हमारे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि गरिमापूर्ण जीवन के लिए जरूरी संसाधनों से हमें वंचित किया जा रहा है। जल की कमी के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, और उनकी आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को "जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार" की गारंटी देता है, और इस अधिकार का संरक्षण राज्य का कर्तव्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में इस अधिकार की व्यापकता पर जोर दिया है। किसानों के लिए, गरिमापूर्ण जीवन का अर्थ है उनकी भूमि पर खेती करने की क्षमता, जो जल के बिना असंभव हो जाती है। यदि सरकार जल संसाधनों की आपूर्ति में विफल रहती है, तो यह किसानों के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह किसानों को उनके कृषि कार्य के लिए आवश्यक संसाधन, विशेष रूप से जल, उपलब्ध कराए। यदि किसी क्षेत्र में किसानों को उनके अधिकारों का उल्लंघन होता है, और सरकार उनके खेतों तक पानी पहुंचाने में विफल रहती है, तो किसान या कोई भी नागरिक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

अतः, किसानों को उनके खेतों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। जीवन के अधिकार में गरिमामय जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है, और यदि सरकार जल उपलब्ध कराने में असफल होती है, तो यह किसानों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसे में किसानों को कानूनी मार्ग अपनाने का पूरा अधिकार है, और न्यायालय से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

धरधरिया केनाल से जुड़ी इस समस्या के समाधान के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारे किसान सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।

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