Friday, September 27, 2024

भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 पर आधारित लेख

भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 का उल्लेख बिजली चोरी और उससे जुड़े अपराधों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। यह धारा उन सभी गतिविधियों को अपराध मानती है जो अनधिकृत रूप से बिजली की चोरी, छेड़छाड़ या किसी प्रकार से विद्युत उपकरणों के साथ अवैध हस्तक्षेप करती हैं।

धारा 135: विद्युत चोरी और दंड

धारा 135 के तहत निम्नलिखित गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है:

1. बिजली चोरी: अगर कोई व्यक्ति विद्युत संयंत्र से बिना अनुमति के बिजली प्राप्त करता है, तो यह बिजली चोरी मानी जाएगी।


2. बिजली के उपकरणों के साथ छेड़छाड़: अगर कोई व्यक्ति मीटर, तार, या किसी अन्य विद्युत उपकरण में बदलाव करता है ताकि वास्तविक बिजली खपत को कम दिखाया जा सके, तो यह भी एक गंभीर अपराध माना जाएगा।


3. अनधिकृत रूप से विद्युत आपूर्ति प्राप्त करना: अगर कोई बिना वैध अनुबंध या अनुमति के बिजली प्राप्त करता है, तो इसे भी अपराध माना जाएगा।



दंड का प्रावधान

धारा 135 के अंतर्गत बिजली चोरी करने वाले व्यक्तियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। इसमें शामिल है:

पहली बार अपराध करने पर, तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों लगाए जा सकते हैं। जुर्माने की राशि चोरी की गई बिजली के मूल्य का तीन गुना हो सकती है।

अगर दोबारा यह अपराध किया जाता है, तो पांच साल तक की जेल या अधिक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

अगर कोई सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या कंपनी का प्रतिनिधि इस चोरी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।


उदाहरण

मान लीजिए, रामलाल नामक व्यक्ति अपने घर में बिजली का उपयोग कर रहा है, लेकिन उसने वैध तरीके से बिजली कनेक्शन नहीं लिया है। वह अपने मीटर को इस प्रकार से छेड़छाड़ करता है कि उसकी खपत कम दिखे। रामलाल के पड़ोसी ने इसकी सूचना बिजली विभाग को दी, और जांच में पाया गया कि रामलाल बिजली चोरी कर रहा था।

इस मामले में, धारा 135 के अंतर्गत रामलाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उसे चोरी की गई बिजली की भरपाई के साथ-साथ तीन गुना जुर्माना देना होगा। साथ ही, उसे तीन साल तक की जेल भी हो सकती है, क्योंकि यह पहली बार का मामला है। अगर रामलाल दोबारा इस तरह की चोरी करता है, तो उसकी सजा और भी अधिक होगी।

निष्कर्ष

भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 विद्युत चोरी जैसे अपराधों को रोकने और विद्युत संसाधनों के उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इस धारा का पालन न केवल बिजली चोरी करने वालों के लिए गंभीर परिणाम लाता है, बल्कि यह विद्युत संसाधनों की सुरक्षा और स्थिरता को भी बनाए रखता है।

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