काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका के लोग कल उस वक्त हैरान रह गए जब एसबीडीसीएल (बिहार स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड) के दो अधिकारी अचानक उनके घरों में घुसकर बिजली कनेक्शन की जांच करने लगे। बिना किसी आदेश या पहचान पत्र दिखाए अधिकारियों ने कुछ घरों में घुसकर वीडियो रिकॉर्डिंग की और इसे विभाग को भेजने का दावा किया। यह घटना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हर दिन जमुई जिले में 10 से 15 एफआईआर दर्ज होती हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अधिकारी नियमों का पालन कर रहे हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी उपभोक्ताओं के घर में बिना अनुमति या बिना उचित प्रक्रिया के प्रवेश नहीं कर सकता। निजता का अधिकार (Right to Privacy) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, और कोई भी अधिकारी इस अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या बिजली विभाग का कर्मचारी।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, किसी भी अधिकारी को जांच करने से पहले अपना पहचान पत्र दिखाना आवश्यक है, जिससे यह पता चले कि वह सही व्यक्ति है और उसे जांच का अधिकार है। बिजली विभाग के अधिकारी को उपभोक्ताओं के घर में घुसने से पहले उचित आदेश पत्र दिखाना चाहिए। यह आदेश पत्र बताता है कि जांच के लिए उस अधिकारी को अधिकृत किया गया है।
किसी भी सरकारी अधिकारी को उपभोक्ता से बात करके, उसकी अनुमति लेकर ही घर में प्रवेश करना चाहिए। यदि उपभोक्ता विरोध करता है, तो अधिकारी को पुलिस की मदद लेनी चाहिए, लेकिन सीधे घर में घुसने का अधिकार नहीं है। यदि कोई अधिकारी बिना अनुमति के घर में घुसता है, तो यह आपराधिक अनधिकार प्रवेश (Criminal Trespass) माना जाएगा, जो कि भारतीय दंड संहिता की धारा 441 के तहत दंडनीय है।
बिजली अधिनियम, 2003 के तहत बिजली चोरी रोकने के लिए अधिकारियों को जांच का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके लिए उन्हें सही प्रक्रिया का पालन करना होता है। धारा 135 के तहत बिजली चोरी की जांच की जा सकती है, लेकिन अधिकारी को जांच करने से पहले सभी कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
कल, बिजली विभाग लक्ष्मीपुर के दो अधिकारी बिना कोई पूर्व सूचना दिए, बिना पहचान पत्र दिखाए और बिना कोई आदेश पत्र के काला पंचायत के कुछ घरों में घुस गए। उन्होंने बिजली कनेक्शन की जांच के नाम पर सीधे घरों में प्रवेश किया और वीडियो रिकॉर्डिंग की। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और उनसे आदेश और पहचान पत्र मांगे, तो अधिकारियों ने अनसुना कर दिया और अपनी मनमानी जारी रखी।
यदि आप बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा ऐसी स्थिति का सामना करते हैं, तो आपके पास कई कानूनी अधिकार हैं: पहचान और आदेश पत्र मांगें; यदि अधिकारी जबरन आपके घर में घुसता है, तो आप स्थानीय पुलिस में आपराधिक अनधिकार प्रवेश (Criminal Trespass) के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं; एसबीडीसीएल के उच्चाधिकारियों को इस बारे में सूचित करें और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करें; उपभोक्ता फोरम में जाकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
बिजली चोरी रोकने के लिए जांच जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिकारियों को कानून का उल्लंघन करने का अधिकार मिल जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी सरकारी अधिकारी को उपभोक्ताओं के घरों में बिना अनुमति के प्रवेश नहीं करना चाहिए। निजता का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, और इसे किसी भी हाल में उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
इस घटना ने काला पंचायत के लोगों को जागरूक कर दिया है, और यह उम्मीद की जा रही है कि आगे से ऐसी घटनाओं में कानून का सही पालन होगा ताकि उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
अस्वीकृति:
यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत सामग्री का उद्देश्य पाठकों को बिजली चोरी और उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित कानूनी पहलुओं के बारे में जागरूक करना है। लेखक किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह देने का दावा नहीं करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कानूनी मामले में अपने स्थानीय अधिकारियों या कानूनी विशेषज्ञों से संपर्क करें। इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और किसी भी सरकारी विभाग या संगठन के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।