बच्चों की पहली कलाकारी हमेशा खास होती है, खासकर जब उनके नन्हे हाथों में रंगों का जादू बिखेरने का पहला मौका हो। मेरी तीन साल की बेटी नव्या ने इस दिवाली पर अपने पहले दीपक को रंगों से सजाया और यह मेरे लिए एक अनमोल पल बन गया। उसके मासूम हाथों से बनाई गई इस कृति में न केवल रंगों का संगम है, बल्कि उसमें उसके पापा के साथ बिताए समय की भी खूबसूरत झलक है।
हमने सबसे पहले उसे रंगों के बारे में समझाया, कि कैसे हर रंग अपनी एक खासियत रखता है और हमारे जीवन में खुशियाँ बिखेरता है। उसने बड़ी मासूमियत से अपने पसंदीदा रंग चुने – पीला, हरा, और लाल। फिर उसकी छोटी-छोटी उँगलियों ने जब दीपक को छूना शुरू किया, तो उस पर उसके बचपन की मासूमियत और खूबसूरती उभर आई। हर बार जब उसने एक रंग को दीपक पर लगाया, उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान देखते ही बनती थी।
यह दीपक सिर्फ एक साधारण कलाकारी नहीं है; यह उस वक्त का प्रतीक है जब एक पिता अपनी बेटी के साथ उसके पहले रचनात्मक प्रयास में शामिल हुआ। यह पल हम दोनों के लिए अनमोल है। इस दीपक की हर एक रंग की छाप हमारी उस साझी यात्रा को दर्शाती है, जहाँ हम दोनों ने मिलकर एक यादगार स्मृति बनाई।
इस दीपावली पर यह दीपक हमारे घर के आँगन को रोशन करेगा, साथ ही हमारी यादों को भी हमेशा के लिए अमर बना देगा।
No comments:
Post a Comment