Thursday, October 3, 2024

SBPDCL की लापरवाही: लक्समीपुर में बिजली संकट और उपभोक्ता अधिकारों का हनन

जब भी अत्याचार होता है, तो वे लोग जो चुप रहते हैं, वे भी गुनहगार होते हैं।” - डेसमंड तूटू

जमुई लक्ष्मीपुर तालुका के निवासियों को हर सप्ताह 2-3 दिन बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है, जो 08-10 घंटे तक जारी रहती है। कोविड के बाद बड़ी संख्या में लोग घर से काम कर रहे हैं, जिसमें मैं भी शामिल हूं। ऐसी स्थिति में नियमित और निर्बाध बिजली सप्लाई आवश्यक है, लेकिन SBPDCL की लापरवाही से हमारा काम रुक जाता है। यह केवल हमारे जीवन पर असर डाल रहा है, बल्कि उन उपभोक्ताओं के अधिकारों का भी उल्लंघन है, जो नियमित रूप से बिजली बिल जमा करते हैं।
भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत, उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा की जाती है। इस अधिनियम में उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे सुरक्षित और गुणवत्ता वाली सेवाएं प्राप्त करें। यदि कोई सेवा—जैसे बिजली—गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं है, तो उपभोक्ताओं को अधिकार है कि वे शिकायत दर्ज करें। SBPDCL को चाहिए कि वह ईमानदार उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करें और उनके अधिकारों का सम्मान करें।
SBPDCL की तरफ से हर दिन लगभग 10-15 केस बिजली बाइपास करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ दर्ज किए जाते हैं, जो सही है। लेकिन कंपनी को अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए कि ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए उचित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उपभोक्ताओं को दंडित करने से पहले कंपनी को यह सोचना चाहिए कि समय पर बिजली न मिलने से हम कैसे काम कर सकते हैं।

पिछले सप्ताह एक और गंभीर घटना हुई, जब कुछ अज्ञात लोग बिना किसी उपभोक्ता की अनुमति के उनके घरों में घुसकर वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे। यह निजता के अधिकार और आर्टिकल 25 का सीधा उल्लंघन है। यह घटना SBPDCL की दादागिरी को उजागर करती है, जो न केवल कानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है।

इसलिए, हम सभी उपभोक्ताओं को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए। हमें अपनी समस्याओं के लिए उचित समाधान मांगने का अधिकार है। अगर SBPDCL इस लापरवाही को नहीं रोकता है, तो हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा। हमारी आवाज़ और अधिकारों की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना चाहिए, ताकि SBPDCL हमारी समस्याओं को गंभीरता से ले सके।

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