काला पंचायत में हर साल दो से तीन लोग सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से गंभीर रूप से घायल होते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं। यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए बड़ा अपराध है, क्योंकि यह लापरवाही किसी की जान की कीमत पर हो रही है। हेलमेट न पहनने से होने वाली ऐसी दुर्घटनाओं से परिवारों की ज़िंदगियाँ तबाह हो जाती हैं।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े डरावने हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि 2019 में करीब 1.51 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए, जिनमें से बड़ी संख्या मोटरसाइकिल सवारों की थी, जो हेलमेट नहीं पहने हुए थे।
मैंने लगातार अपने गाँव और आस-पास के क्षेत्रों में लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करने की कोशिश की है। मैंने कई ब्लॉग्स लिखे हैं और व्यक्तिगत बातचीत के जरिए समझाया है, लेकिन अब भी लोगों की लापरवाही देखने को मिलती है। यह केवल एक सुरक्षा उपाय नहीं है, बल्कि जान बचाने का सबसे आसान तरीका है, जिसे लोग समझने में असफल हो रहे हैं।
इसके बावजूद, कई गाँवों में लोग अभी भी इस सुरक्षा उपाय को नजरअंदाज कर रहे हैं। कुछ पिता अपने नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल चलाने देते हैं और इस बात से खुश होते हैं कि उनका बेटा बाइक चला रहा है, लेकिन वे ये नहीं समझते कि ये कितना खतरनाक हो सकता है। हेलमेट न पहनने के कारण हर साल कई जानें जाती हैं, और यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि किसी की ज़िंदगी होती है, जो एक साधारण गलती से छिन जाती है।
मेरे गाँव, जिसकी जनसंख्या 6000 के करीब है, लगभग हर घर में एक मोटरसाइकिल है, लेकिन हेलमेट पहनने वालों की संख्या बहुत कम है। पिछले 24 घंटों में मैंने कई तस्वीरें खींची हैं, जिनमें साफ दिखता है कि लोग बिना हेलमेट के यात्रा कर रहे हैं। ये तस्वीरें दिखाती हैं कि लोगों ने सड़क सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण पहलू को अभी तक गंभीरता से नहीं लिया है।
यह समस्या केवल मेरे गाँव तक सीमित नहीं है; आस-पास के कई गांवों में भी यही हाल है। हेलमेट न पहनने के कारण हर साल कई जानें जाती हैं, और यह केवल आंकड़े नहीं हैं, यह किसी के प्रियजन की मौत है।
हमारे जिले के परिवहन अधिकारी (DTO) की भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती। वे सिर्फ अपने कार्यालय के पास चेकिंग करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चेकिंग और नाका बंदी की सख्त जरूरत है।
हमारे जिले के परिवहन अधिकारी (DTO) की भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती। वे सिर्फ अपने कार्यालय के पास चेकिंग करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चेकिंग और नाका बंदी की सख्त जरूरत है।
मैं DTO, जमुई से निवेदन करता हूँ कि ग्रामीण क्षेत्रों में सख्त चेकिंग और वित्तीय जुर्माने की कार्रवाई करें। खासकर उन लोगों के खिलाफ जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस या बीमा नहीं है। हेलमेट और लाइसेंस जैसी जरूरी चीज़ों के बिना ड्राइविंग करना कानूनन भी गलत है और जान के लिए भी खतरनाक। अगर हम जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में और ज्यादा दुर्घटनाएँ देखने को मिलेंगी।
हमारे समाज में यह समझना जरूरी है कि हेलमेट सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि जीवन का सुरक्षा कवच है।