Wednesday, October 9, 2024

सरकारी परियोजनाओं में BIS मानकों की अनदेखी: मनरेगा और अन्य योजनाओं में भ्रष्टाचार


भारत में सरकार द्वारा चलाई जाने वाली कई परियोजनाएँ, खासकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) जैसी योजनाएँ, भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी का शिकार हो रही हैं। मेरी जानकारी के अनुसार, काला पंचायत में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। निर्माण कार्य पूरे होने के कुछ साल बाद ही मरम्मत और रखरखाव की आवश्यकता पड़ जाती है, जिससे यह स्पष्ट है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों का पालन न करना, सरकार के फंड का दुरुपयोग और गुणवत्ता की अनदेखी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कोई भी NGO, सरकारी अधिकारी या एजेंसी इस बात की जाँच नहीं कर रही है कि इन परियोजनाओं में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता क्या है। इससे न केवल जनता के पैसों की बर्बादी हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई पंचायत में हाल ही में हुए निर्माण कार्य, जो XV वित्त आयोग और मनरेगा के तहत किए गए थे, अब कुछ वर्षों बाद ही मरम्मत की माँग कर रहे हैं। यह स्थिति भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जहाँ परियोजनाओं की जाँच और गुणवत्ता नियंत्रण के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं किया जा रहा है।

यदि सही समय पर इन कार्यों का ऑडिट नहीं किया गया, तो भविष्य में और अधिक वित्तीय हानि और घटिया संरचनाओं की समस्या देखने को मिलेगी। पंचायत स्तर पर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण का अभाव इस बड़े भ्रष्टाचार की जड़ में है।

इस स्थिति को सुधारने के लिए यह जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग BIS मानकों का पालन अनिवार्य करें, और साथ ही इन परियोजनाओं का नियमित ऑडिट किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो सामग्री इस्तेमाल की जा रही है, वह उच्च गुणवत्ता की हो और जनता के पैसे का सही उपयोग हो।

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