काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई में हर साल डूमरिया आहार के किनारे बसे किसान अपने खेतों और आस्था के बीच एक संघर्ष का सामना करते हैं। यहां की सबसे बड़ी चुनौती है 2 नंबर पइन से आने वाला पानी, जो अब आहार तक नहीं पहुंच पा रहा। किसानों की आस पानी पर टिकी रहती है, लेकिन इस बार भी पइन सूखा पड़ा है।
हालांकि, मां दुर्गा की कृपा से इस बार बारिश ने थोड़ी राहत दी है। आहार में लगभग 3 फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे मां दुर्गा का विसर्जन तो हो जाएगा। भक्तजन इस पावन आहार के जल में मां की प्रतिमा को हर साल की तरह विदा करेंगे। लेकिन सवाल ये है—अगर बारिश न होती तो क्या ये विसर्जन संभव हो पाता?
काला पंचायत के किसान इस बार भी किसी तरह धान की रोपाई कर पाए हैं, लेकिन चिंता के बादल रबी सीजन पर मंडरा रहे हैं। 500 एकड़ से अधिक जमीन सूखा रह सकता है, और ये आने वाले समय में किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।
डूमरिया आहार, जो कभी इस क्षेत्र के किसानों की जीवन रेखा हुआ करता था, अब अपने अस्तित्व के लिए बारिश के पानी पर निर्भर है। लघु जल संसाधन विभाग की ओर से पत्राचार और आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन ठोस कदम अभी तक उठाए नहीं गए। पानी की ये समस्या सिर्फ खेतों को नहीं, किसानों की उम्मीदों और आस्थाओं को भी सूखा रही है।
इस बार मां दुर्गा का विसर्जन तो भगवान की कृपा से हो जाएगा, लेकिन अगर आने वाले सीजन में पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो किसानों के लिए यह आस्था और जीवन का विसर्जन साबित हो सकता है।
लक्ष्मीपुर तालुका के काला पंचायत के किसान हर साल मां की आराधना करते हैं, लेकिन उनकी मेहनत और उम्मीदें पानी पर निर्भर करती हैं। आहार का सूखना, उनके जीवन और रोज़ी-रोटी का सूखना है। क्या लघु जल विभाग इस गंभीर समस्या को समझ पाएगा और समय रहते कोई ठोस कदम उठाएगा, यह सवाल अब हर किसान के दिल में गूंज रहा है।
आज डूमरिया आहार में बारिश का पानी तो है, लेकिन किसान जानते हैं कि यह राहत अस्थायी है। अगर सरकार और जल विभाग ने जल्दी से कोई कदम नहीं उठाया, तो आने वाला समय इस पवित्र आहार और यहां के किसानों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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