Saturday, October 19, 2024

माटिया गांव, लक्ष्मीपुर, जमुई, बिहार में प्रकृति ग्राम: एक आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल



माटिया गांव, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई, बिहार में स्थित "प्रकृति ग्राम" एक अनूठी पहल के तहत गांव को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाने का काम कर रहा है। यहां विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे गांव की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

मसाला उद्योग: ग्रामीणों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

प्रकृति ग्राम में कुटीर उद्योगों के माध्यम से "मसाला उद्योग" की स्थापना की गई है, जो ग्रामीणों, विशेषकर "नेचर दीदी" और "नेचर भैया" को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही यह गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। यहां हल्दी, जीरा, काली मिर्च, धनिया और लाल मिर्च पाउडर का 100% शुद्ध और सस्ता उत्पादन किया जा रहा है। इन मसालों का उपयोग न केवल आर्थिक बचत करेगा, बल्कि यह स्वास्थ्य में सुधार के लिए भी प्रभावी साबित हो रहा है।

नर्सरी: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान

प्रकृति ग्राम ने पौधों की एक नर्सरी भी स्थापित की है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नर्सरी के माध्यम से पर्यावरण हितैषी पौधों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, यहां लकड़ी देने वाले और औषधीय पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण का संरक्षण हो, बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सके।

कार्बो फार्मर: सिंदुवार पत्तियों से आर्थिक लाभ

प्रकृति ग्राम के "कार्बो फार्मर" कार्यक्रम के तहत किसान और मजदूर "सिंदुवार" पौधे की पत्तियों को तोड़कर कंपनियों को बेचकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। इसके साथ ही, यहां बागवानी और खेती में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी में इज़ाफ़ा हो रहा है।

प्रमुख योगदानकर्ता:

अर्जुन मंडल जी: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अर्जुन मंडल जी कृषि, बागवानी और नर्सरी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उनकी ये पहल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान दे रही है।

मुक्ति रानी जी: सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मुक्ति रानी जी सामाजिक पहलों के माध्यम से एक सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रयासरत हैं। उनका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना और उन्हें मुख्यधारा में लाना है।

नंदलाल जी: नदी संरक्षण में विशेषज्ञता रखने वाले नंदलाल जी प्रकृति ग्राम के माध्यम से जल और नदी संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। उनके प्रयास से जलीय पर्यावरण का संरक्षण हो रहा है और स्थानीय जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।

प्रकृति ग्राम के इन प्रयासों ने न केवल पर्यावरण और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए हैं, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। माटिया गांव में इस तरह की पहलें बिहार के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणास्रोत साबित हो सकती हैं।

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