जमुई लक्ष्मीपुर काला
जीनहरा का यह प्राइवेट क्लिनिक, जो सरकारी स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र जीनहरा से केवल 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, एक खतरनाक अस्वच्छता और लापरवाही का गढ़ बन चुका है। यह हर रोज़ लगभग 20 से 30 मरीजों का इलाज करता है, लेकिन यहाँ की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि मानो मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार होकर घर जा रहे हों। दीवारों से लटके ड्रिप के बोतलें, अव्यवस्थित तारें और चारों ओर फैला कचरा किसी डरावने दृश्य का अहसास कराता है, मानो यह कोई क्लिनिक नहीं बल्कि अराजकता का केंद्र हो।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, सभी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की बीमारी फैलने का खतरा न हो। लेकिन जीनहरा का यह क्लिनिक इन नियमों को पूरी तरह से अनदेखा कर रहा है। खुले में पड़े हुए सिरिंज, इस्तेमाल की गई ड्रिप बोतलें, और अन्य चिकित्सा कचरा संक्रमण फैलाने में सहायक बन सकते हैं। यह जगह किसी मरीज के ठीक होने का स्थान कम और संक्रमण का घर ज्यादा प्रतीत होती है।
आईपीसी की धारा 269 और 270 के अनुसार, किसी भी ऐसी लापरवाही को अपराध माना जाता है, जो संक्रमण फैलाने का कारण बन सकती है। धारा 269 उन कृत्यों को कवर करती है जो लापरवाही से किसी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धारा 270 में जानबूझकर किए गए कृत्य शामिल हैं जो संक्रामक बीमारी के फैलाव का कारण बनते हैं। इस तरह के क्लिनिक में स्वच्छता की अनदेखी इन धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन है।
"मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम" के तहत, हर व्यक्ति का यह अधिकार है कि उसे एक सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य सेवा मिले। इस क्लिनिक की भयावह स्थिति स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन इस स्थिति में उन्हें ठीक होने की बजाय और बीमार होने का खतरा बना रहता है।
यह मामला केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक चेतावनी है। विभाग को ऐसे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इस तरह की लापरवाही पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए क्लिनिकों के नियमित निरीक्षण, भारी जुर्माने और आवश्यकता होने पर लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाने चाहिए।
इस क्लिनिक की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूक हैं, या लापरवाही और उदासीनता के बीच अपनी जिंदगी को जोखिम में डालने को मजबूर हैं?
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