पिछले कुछ हफ्तों में पूर्व मध्य रेलवे, जमुई (बिहार) मोटर पार्किंग में मेरे साथ एक परेशानी हुई थी। मैंने अपनी बाइक को वहां के पार्किंग क्षेत्र में दो दिन के लिए खड़ा किया था.
मैंने अपना हेलमेट स्टाफ कैबिन में रखने का फैसला किया, जैसा कि वहां आम चलन है. स्टाफ के लोगों ने बिना किसी हिच के मेरा हेलमेट ले लिया, उस पर गाड़ी का नंबर लिखा और उसे अपने कैबिन के अंदर रख दिया.
समस्या तब हुई जब मैं दो दिन बाद वापस आया और अपना हेलमेट लेने गया. स्टाफ के लोगों को मेरा हेलमेट ढूंढने में परेशानी हुई. असल मुद्दा यह था कि कैबिन के अंदर सैकड़ों की संख्या में ऐसे ही रखे गए हेलमेट थे - किसी भी प्रकार की व्यवस्था के बिना. मैंने उनसे मेरा हेलमेट ढूंढने का अनुरोध किया, लेकिन वे असफल रहे.
यह स्थिति निराशाजनक है। रेलवे स्टेशन पर एक बोर्ड लगा होना तो ठीक है जो यह बताता है कि स्टाफ हेलमेट रखने की जिम्मेदारी नहीं लेता, लेकिन फिर भी वे हेलमेट क्यों रखते हैं? इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि रेलवे प्रशासन इतने सारे असंगठित हेलमेटों को स्टाफ कैबिन में जमा होने देता है.
यह व्यवस्था यात्रियों के लिए असुविधाजनक है, खासकर उन लोगों के लिए जो जल्दी में होते हैं और ट्रेन पकड़ने के लिए जाते हैं. मेरा रेलवे प्रशासन से अनुरोध है कि वे पूर्व मध्य रेलवे, जमुई (बिहार) पर स्पष्ट निर्देश जारी करें. स्टाफ कैबिन में केवल उन्हीं हेलमेटों को रखा जाना चाहिए जो उसी दिन रखे गए हों. इससे यात्रियों को भी परेशानी नहीं होगी और हेलमेट चोरी होने की समस्या भी कम हो जाएगी.
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