प्रसव कक्ष के बाहर पलकों का पहरा...
प्रसव कक्ष के बाहर का गलियारा एक सन्नाटे से गुंजायमान है, जिसे कभी-कभी टूटते हुए स्वर और घंटी की खनक चीरती है। इधर-उधर भावी पिताओं की टोली बैठी है, उनकी आँखों में कहानी छलकती है - कुछ में खुशी की चमक, तो कुछ में घबराहट का साया। मैं भी उनमें से एक हूँ, मेरा मन उधेड़बुन में घुल रहा है, पर हृदय आने वाले कल की खुशियों से नाच रहा है। हमारे परिवार में नन्हे मेहमान का आगमन होने वाला है, और ये पल किसी त्यौहार से कम नहीं लगता।
जब से हमें इस सौभाग्य की प्राप्ति का पता चला है, तब से घर में खुशियों का मेला लगा है। हमने आशियाने को सजाया है, नन्हे परी या नन्हें योद्धा के स्वागत के लिए हर छोटी-बड़ी चीज़ का इंतज़ाम किया है, और माता के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा है। फिर भी, अनुभव का कोई मोल नहीं। पहली संतान के आगमन का साक्षी तो बन चुका हूँ, पर इस पल की बेचैनी, ये मीठी घबराहट किसी नशे से कम नहीं। कब डॉक्टर का फोन आएगा, कब मैं अपने नवजात को गोद में लूंगा, ये खयाल बार-बार मन में कौंधता है।
आँखें मूंदकर, मैं उस पिता की तस्वीर बनाता हूँ जो मैं बनना चाहता हूँ। अपने दोनों बच्चों के लिए मजबूत स्तंभ, उनके हर सुख-दुख में साथ देने वाला सखा, और मार्गदर्शक प्रकाश। आने वाले नन्हे मेहमान के लिए भी मैं अनगिनत सपने संजोए हुए हूँ - पहला कदम, पहली किलकारी, वो अनगिनत सैर-सपाटे जो हम एक बड़े परिवार के रूप में करेंगे। मैं अपने बच्चों को दया, करुणा और दृढ़ता के मूल्य सिखाना चाहता हूँ।
यह इंतज़ार शायद लंबा लगता है, पर मुझे पता है कि ये जीवन भर के अनमोल पलों की शुरुआत है। पहली मुस्कान, स्कूल का पहला दिन, ये सारी खूबसूरत यादें मेरी आँखों के सामने तैरने लगती हैं। ये बेचैनी, ये खुशी से झूमता हुआ हृदय, पितृत्व का असली सार है।
एक गहरी सांस लेकर मैं खुद को शांत करता हूँ। हमारे बच्चे का आगमन हमारे परिवार में एक खूबसूरत बदलाव लाने वाला है। मैं प्यार और आशा से परिपूर्ण हूँ, खुले बाहों से इस अविश्वसनीय यात्रा को अपनाने के लिए तैयार। हमारा परिवार जितना बड़ा होगा, हमारे दिलों की खुशी उतनी ही दोगुनी होती जाएगी।
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