नमस्कार पाठकों!
आपका स्वागत है काला पंचायत के तेरहवें भाग में! आज हम एक नए किरदार से मिलेंगे - गट्टू!
गट्टू कौन है?
गट्टू, ओमप्रकाश का बड़ा बेटा है। कुछ महीनों पहले, स्थानीय अखबारों के एक लेखक ने सरकारी जमीन (नाला) पर हो रहे अवैध निर्माण कार्यों के बारे में कुछ लेख लिखे थे. ये निर्माण कार्य ओमप्रकाश की देखरेख में हो रहे थे।
गट्टू का कारनामा!
अपनी पॉलिटिकल साख बचाने के लिए, ओमप्रकाश ने गट्टू को उस लेखक के पास भेजा. लेकिन ये कोई साधारण भेंट नहीं थी!
बॉलीवुड स्टाइल धमकी!
फिल्मी स्टाइल में, गट्टू लेखक के घर पहुंचा और उसे धमकाया कि वह उसके खिलाफ लिखना बंद कर दे।
लेकिन, गट्टू को क्या मिला? धोखा!
लेखक गट्टू की धमकियों से नहीं डरा. उसने सीधे ओमप्रकाश के खिलाफ निकटतम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा दी!
अब क्या होगा?
क्या ओमप्रकाश को अपनी करतूतों की सजा मिलेगी? क्या गट्टू की धमकियों का कोई असर होगा?
ये सवाल हमें अगले भाग में जानने को मिलेंगे!
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना ज़रूरी है।
- धमकियों से डरना नहीं चाहिए।
- कानून का राज हमेशा बना रहना चाहिए।
आपकी राय क्या है?
आपको क्या लगता है, गट्टू को अपनी हरकतों की कीमत चुकानी पड़ेगी? क्या लेखक को न्याय मिलेगा?
अपनी राय कमेंट में जरूर शेयर करें!
काला पंचायत - भाग 13: अस्वीकरण
यह कहानी काल्पनिक है और किसी भी वास्तविक घटना या व्यक्तियों से इसका कोई संबंध नहीं है।
इस कहानी का उद्देश्य मनोरंजन और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है।
इस कहानी में व्यक्त किए गए विचार और राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं और इन्हें किसी भी समूह या संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
लेखक किसी भी प्रकार के नुकसान या क्षति के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगा जो इस कहानी को पढ़ने या साझा करने से हो सकता है।
धन्यवाद।
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