नमस्कार प्यारे पाठकों!
आपका स्वागत है काला पंचायत के बारहवें भाग में। इस भाग में, हम दो नए किरदारों से मिलेंगे - 'भ्रष्ट इंजीनियर साहब' और 'चापलूस रोहित'।
इंजीनियर साहब:
यह मनरेगा का एक भ्रष्ट अधिकारी है जो ओमप्रकाश के साथ मिलकर काम करता है। वह गलत जानकारी और झूठे वादे करके ओमप्रकाश और रोहित को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है।
रोहित:
ओमप्रकाश का चापलूस और इंजीनियर साहब का गुप्तचर। वह इंजीनियर साहब से मिली गलत जानकारी को ओमप्रकाश तक पहुंचाता है और भ्रष्टाचार में उनकी मदद करता है।
इंजीनियर साहब की चाल:
इंजीनियर साहब नीति नियमों को तोड़ने की कोशिश करता है, ठीक उसी तरह जैसे अंग्रेज किया करते थे। वह आरटीआई कार्यकर्ता को धमकाता है और गलत सूचनाओं का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करता है।
क्या रोहित भी भ्रष्ट हो गया है?
पहले रोहित ऐसा नहीं था, लेकिन अब वह भी ओमप्रकाश के साथ मिलकर भ्रष्टाचार में शामिल है।
आगे क्या होगा?
क्या राणा एकांत और रबि इन भ्रष्ट लोगों के खिलाफ लड़ाई में सफल होंगे? क्या रोहित अपनी गलतियों का एहसास करेगा?
अगले भाग में जानने के लिए बने रहिए!
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना ज़रूरी है।
- गलत सूचनाओं से सावधान रहें।
- सच की हमेशा जीत होती है।
आपकी राय क्या है?
आपको लगता है कि रोहित किस रास्ते पर जाएगा? क्या इंजीनियर साहब और ओमप्रकाश को सजा मिलेगी?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं!
काला पंचायत - भाग 12: अस्वीकरण
यह कहानी काल्पनिक है और किसी भी वास्तविक घटना या व्यक्तियों से इसका कोई संबंध नहीं है।
इस कहानी का उद्देश्य मनोरंजन और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है।
इस कहानी में व्यक्त किए गए विचार और राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं और इन्हें किसी भी समूह या संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
लेखक किसी भी प्रकार के नुकसान या क्षति के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगा जो इस कहानी को पढ़ने या साझा करने से हो सकता है।
धन्यवाद।!
No comments:
Post a Comment