एक महीने पहले जमुई जिलाधिकारी ने गांवों में जाकर लोगों से पानी की समस्या के बारे में जांच-पड़ताल की थी। उन्होंने कुछ वीडियो भी बनाए थे जो वायरल हुए थे। जिलाधिकारी के कार्यकाल से लगभग 10 किलोमीटर दूर बसे एक पंचायत रत्नपुर गिद्धौर प्रखण्ड की कहानी बयां करती है, जहां कुछ परिवार को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों ने कई बार पीएचईडी विभाग और कॉल सेंटर में शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। जिलाधिकारी की पहल के बाद भी, रत्नपुर गांव के लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
यह कहानी कई सवाल उठाती है:
- जिलाधिकारी की जांच का क्या फायदा हुआ, जब तक कि रत्नपुर गांव की समस्या का समाधान नहीं हो जाता?
- पीएचईडी विभाग और कॉल सेंटर ग्रामीणों की शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं?
- क्या रत्नपुर गांव के लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता रहेगा?
यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है कि जिलाधिकारी के कार्यक्षेत्र में ही लोगों को पीने के पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह सरकार की जवाबदेही और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाता है।
यह उम्मीद की जाती है कि जिलाधिकारी इस मामले में तुरंत कार्रवाई करेंगे और रत्नपुर गांव के लोगों को पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि पीएचईडी विभाग और कॉल सेंटर ग्रामीणों की शिकायतों पर ध्यान दें और उनका त्वरित समाधान करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। यह केवल जिलाधिकारी या पीएचईडी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि हर किसी को पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त हो।
यह ब्लॉग उन सभी लोगों को समर्पित है जो पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
आइए हम सब मिलकर इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाएं और एक ऐसा समाज बनाएं जहां हर किसी को स्वच्छ और पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध हो।
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