लक्ष्मीपुर तालुका के जमुई जिले में स्थित काला पंचायत का पैक्स केंद्र आज अपनी बदहाली और अव्यवस्था के कारण किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह केंद्र सहकारिता विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण है।
इस केंद्र से अब तक केवल 9 किसानों का धान खरीदा गया है। यहां सूचना बोर्ड का पूरी तरह अभाव है, जो किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। न ही यहां कोई निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी है और न ही धान के रेट की कोई स्पष्टता। किसान मोबाइल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर पूछकर जानकारी जुटाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल परेशान करती है बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।
केंद्र का भवन जर्जर हालत में है, जहां फर्श टूटे हुए हैं और संरचना कमजोर दिखती है। किसानों ने यह भी बताया कि केंद्र पर कर्मचारी अक्सर गायब रहते हैं। यह व्यवस्था किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही है और गड़बड़ियों की संभावना को और बढ़ा रही है।
वहीं दूसरी ओर, सहकारिता विभाग सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियों की तस्वीरें और रिपोर्ट साझा करने में व्यस्त है। दरभंगा और अन्य स्थानों पर धान अधिप्राप्ति कार्य के निरीक्षण की खबरें खूब प्रचारित हो रही हैं, लेकिन काला पंचायत के इस केंद्र की हकीकत से यह प्रचार एकदम विपरीत है।
यह केंद्र लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अव्यवस्था और जानकारी के अभाव ने इसे उनके लिए सिरदर्द बना दिया है। किसानों ने बातचीत में यह भी कहा कि यहां हर कदम पर असुविधा होती है, और उन्हें लगता है कि धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है।
इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। सहकारिता विभाग को इस केंद्र का निरीक्षण कर यहां की व्यवस्थाओं में सुधार लाना चाहिए। सूचना बोर्ड, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, और केंद्र की आधारभूत संरचना में सुधार किसानों के हित में जरूरी है।
यह समय है कि सोशल मीडिया पर दिखावे से बाहर आकर प्रशासन वास्तविक समस्याओं का समाधान करे और किसानों के लिए काम करे। काला पंचायत का पैक्स केंद्र एक आदर्श केंद्र बन सकता है, बशर्ते इसे सही दिशा और ध्यान मिले।
लेखक: प्रमोद कुमार पांडेय
अस्वीकरण:
इस लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और जानकारी पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन और संबंधित विभाग का ध्यान वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। इसमें कही गई बातें पूर्णतः सत्यता की गारंटी नहीं देती हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे स्वतंत्र रूप से तथ्यों की जांच करें। लेखक किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या विवाद के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
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