बिहार में 2024-25 के लिए धान खरीद की स्थिति किसानों के लिए चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। केंद्र सरकार ने इस साल धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की है। सामान्य धान के लिए MSP ₹2,300 प्रति क्विंटल और ग्रेड 'ए' धान के लिए ₹2,320 प्रति क्विंटल तय की गई है। यह बढ़ोतरी किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने के उद्देश्य से की गई है।
हालांकि, बिहार में जमीनी स्तर पर स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड में 13 पैक्स केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन खरीद की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। दो महीने पहले सरकार ने धान खरीद की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कुछ केंद्रों पर मात्र 5-6 क्विंटल धान ही खरीदा गया है।
किसानों को उम्मीद थी कि इस बार MSP और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी की सहायता से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। लेकिन धीमी प्रक्रिया और प्रबंधन की लापरवाही ने किसानों को निराश किया है।
कई किसान यह सवाल उठा रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया से प्रभावित केंद्रों को छोड़कर अन्य केंद्रों पर भी खरीद क्यों नहीं हो रही है? समय पर धान न बिकने की वजह से उन्हें निजी व्यापारियों के पास जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें MSP से कम दाम पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
बिहार सरकार को चाहिए कि वह धान खरीद के लिए एक स्पष्ट और त्वरित योजना लागू करे। MSP के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए अतिरिक्त सब्सिडी या बोनस का ऐलान भी आवश्यक है, ताकि किसान अपनी मेहनत का उचित मुआवजा प्राप्त कर सकें।
धान खरीद में हो रही देरी सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, यह हजारों किसानों की आजीविका और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव डाल रही है। सरकार को किसानों के हित में जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि उन्हें उनकी उपज का सही मूल्य और सम्मान मिल सके।
किसान केवल समर्थन मूल्य ही नहीं, बल्कि समय पर खरीद प्रक्रिया और पारदर्शिता की भी उम्मीद करते हैं। यह उनके जीवन और उनकी मेहनत के प्रति सही मायने में सम्मान होगा।
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