जमुई जिले के काला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड में स्थित दो प्रमुख आहर, काला आहर और करणपुर आहर, किसानों के लिए जीवनदायिनी की तरह हैं। ये आहर लगभग 1,000 एकड़ भूमि को सिंचाई का पानी प्रदान करते हैं और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। हालांकि, इन आहरों के किनारे और लगभग 20-30 फीट की दूरी पर कई तालाबों का निर्माण किया गया है, जिनकी आवश्यकता और उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
मेरे सर्वेक्षण के अनुसार, इन तालाबों में से अधिकांश का निर्माण मनरेगा योजना के तहत किया गया है। मनरेगा पोर्टल के अनुसार, एक ही क्षेत्र में 50 मीटर की दूरी में तीन तालाबों का निर्माण हुआ है, जिनकी कुल लागत लगभग 2 से 3 लाख रुपये है। इस पर विचार करते हुए यह सवाल उठता है कि क्यों न इस धन का उपयोग काला आहर और करणपुर आहर की गहराई बढ़ाने और उनकी जल संग्रहण क्षमता को सुधारने में किया जाए? इससे न केवल किसानों को ज्यादा पानी मिलेगा, बल्कि यह उनका दीर्घकालिक समाधान भी हो सकता है।
इन तालाबों का निर्माण मुख्य रूप से आहरों के किनारों पर किया गया है, जिससे आहरों के प्राकृतिक जल प्रवाह में रुकावट आ सकती है ! और उनकी उपयोगिता कम हो सकती है।
यह एक बड़ा सवाल है, जो संबंधित विभागों से पूछा जाना चाहिए: आखिर क्यों इन तालाबों का निर्माण आहरों के किनारों पर किया जाता है ?
अगर इन तालाबों के निर्माण में खर्च हो रहे सरकारी धन का उपयोग आहरों की गहराई बढ़ाने और उनकी जल संग्रहण क्षमता को सुधारने में किया जाए, तो यह कहीं ज्यादा लाभकारी साबित होगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को जल की अधिक उपलब्धता मिलेगी।
क्षेत्र के किसान मानते हैं कि आहरों के बेहतर प्रबंधन और गहराई बढ़ाने से उनकी सिंचाई संबंधी समस्याएं स्थायी रूप से हल हो सकती हैं। सरकार और संबंधित विभागों को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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