Saturday, December 14, 2024

क्या काला पंचायत के नाले सिर्फ ठेकेदारों के लिए बन रहे हैं?

लक्ष्मीपुर काला पंचायत में विकास योजनाओं के नाम पर जो खेल चल रहा है, वह ग्रामीणों के साथ विश्वासघात है। ग्रे वाटर प्रबंधन के लिए ₹6,10,500 की लागत से नाला बनाया गया, लेकिन इसे देखकर लगता है कि यह योजना केवल कागजों पर ही विकास का दावा कर रही है।

नाले का निर्माण ऐसे क्षेत्र में किया गया है जहां पानी का कोई बहाव ही नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाला उन इलाकों में बनाया जाना चाहिए था जहां जल निकासी की समस्या है। धरदरिया पैन का रास्ता, जो पिछले दो सालों से बंद पड़ा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लेकिन वहां काम न होकर पैसा ऐसे जगह लगाया गया जहां इसका कोई फायदा नहीं।

यह समझ से परे है कि जब नाले का पानी ही नहीं बहेगा, तो इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? पंचायत के कामों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी का अभाव साफ दिखता है। ग्रामीणों का मानना है कि यह पूरा मामला "अपनों के लिए विकास" का है। सरकारी धन का ऐसा दुरुपयोग जनता की समस्याओं को और बढ़ा रहा है।

धरदरिया जैसे इलाकों में जल निकासी की सख्त जरूरत है। लेकिन योजनाओं को वहां लागू नहीं किया जा रहा है। इसका कारण साफ है—पंचायत में काम जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि सुविधा और लाभ के हिसाब से हो रहे हैं। जनता को यह सवाल करना होगा कि जो पैसा उनके भले के लिए था, उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है।

पंचायत के कामों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब ग्रामीणों की जिम्मेदारी है। अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो कल ऐसी ही योजनाएं आपके हिस्से की सड़क, पानी और विकास को कागजों तक सीमित कर देंगी।

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