Thursday, December 5, 2024

काला पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल साबित हुआ है।

काला पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल साबित हुआ है। सफाई कर्मियों को पिछले डेढ़ साल से वेतन नहीं मिला है, जिसकी वजह से उन्होंने काम करना बंद कर दिया है। सफाई और कचरा निपटान का पूरा सिस्टम ठप हो गया है, जिससे पंचायत में गंदगी का अंबार लग गया है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई कर्मियों को उनके काम के लिए एक लाख बीस हज़ार रुपये की राशि 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत की गई थी। यह राशि पंचायत सचिव नरेंद्र कुमार और मुखिया रंधीर यादव के माध्यम से जारी होनी थी, लेकिन अब तक सफाई कर्मियों को भुगतान नहीं किया गया है। दूसरी ओर, पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने वेतन को प्राथमिकता दी, जबकि सफाई कर्मियों के काम को नजरअंदाज किया गया।

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत पंचायत में कई परियोजनाएं जैसे कचरा संग्रहण और निपटान केंद्र बनाए गए, लेकिन वे केवल दिखावे के लिए रहे। पंचायत में ठेकेदारों को इस काम से फायदा हुआ, पर आम जनता तक इसका कोई लाभ नहीं पहुंचा। कचरा निपटान की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, और जगह-जगह गंदगी और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इस स्थिति ने बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है।

पंचायत में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है। नालियों की सफाई नहीं हो रही है, सड़कों पर गंदगी फैली हुई है, और स्वच्छता का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नागरिकों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों ने विकास योजनाओं को केवल वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया और सफाई के काम को अनदेखा कर दिया।

पंचायत के लोग अब जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि सफाई कर्मियों को उनका बकाया वेतन दिया जाए और पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए। पंचायत सचिव और मुखिया की जिम्मेदारी तय कर इस मामले में कार्रवाई की मांग की जा रही है। यह बेहद जरूरी है कि स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को साकार करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

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