प्रिय किसान साथियों,
आज मैंने पटना में मंत्री अप्त सचिव/प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार से मुलाकात कर आपकी समस्याओं को मजबूती से उनके सामने रखा। महात्मा गांधी ने कहा था, "जो बदलाव आप दुनिया में देखना चाहते हैं, उसे सबसे पहले खुद में लाएं।" इस भावना के साथ, मैंने आपकी आवाज को उठाने और आपकी समस्याओं का समाधान तलाशने का प्रयास किया।
मैंने पईन की भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों के बारे में सवाल किया। अब तक सिंचाई विभाग ने इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी है, जिससे किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मैंने मांग की कि यह दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसानों को अपनी जमीन और उससे जुड़े फैसलों की जानकारी हो सके।
मैंने जमुई में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा बार-बार अतिक्रमण का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर भी सवाल खड़े किए। वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच और इस मुद्दे पर किसानों के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। महात्मा गांधी का कहना था, "सत्य ही ईश्वर है।" इस सच्चाई की तलाश में मैंने आग्रह किया कि किसानों को उनकी मेहनत का सही फल मिल सके।
किसानों के नुकसान की भरपाई पर भी मेरी चर्चा हुई। जल की कमी और बढ़ते खर्चों ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। मैंने इस पर ठोस कदम उठाने और किसानों को राहत देने की मांग की। जब खेतों में पानी नहीं होगा, तो मेहनत का फल कैसे मिलेगा? किसानों के जीवन में खुशी और स्थिरता लाने के लिए विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
मैंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ आपकी समस्याओं को सामने रखा है। यह संघर्ष जारी रहेगा, और अगर समाधान नहीं मिलता, तो इसे उच्च स्तर पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। महात्मा गांधी के शब्दों में, "संघर्ष में ही शक्ति निहित होती है।" आइए, हम सभी संगठित होकर अपनी लड़ाई जारी रखें।
आपका
प्रमोद पांडे
कला पंचायत
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