Tuesday, December 31, 2024

मनरेगा से खेती तक, 2024 के अनुभवों का सफर – पढ़ें मेरी कहानी।

नववर्ष 2025 की शुरुआत पर, जब हम नए संकल्पों और योजनाओं के साथ इस वर्ष को अपनाते हैं, मुझे पिछले साल की घटनाओं पर विचार करने का एक अवसर मिलता है। 2024 मेरे लिए एक यात्रा की तरह रहा, जिसमें न केवल सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी महत्वपूर्ण बदलाव आए। यह वर्ष मेरे लिए एक नई समझ और सीख का वर्ष था, जिसमें मैंने कई मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा।

"हमेशा कोशिश करो, सपने देखो और विश्वास रखो, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो खुद पर विश्वास करते हैं।" यह वाक्य मुझे इस वर्ष में कई बार याद आया। मैंने इस समय के दौरान कई मुद्दों पर लिखा, जैसे मनरेगा योजना, बिहार के PACS केंद्र, और 15वें वित्त आयोग के फंड का दुरुपयोग। इन सब पर विचार करते हुए मुझे यह समझ में आया कि यह केवल आंकड़े और योजनाएँ नहीं होतीं, बल्कि इनमें लोगों की वास्तविक ज़िंदगी और उनकी मेहनत जुड़ी होती है। मनरेगा योजना में ग़ोस्ट अटेंडेंस, PACS में किसानों की समस्याएँ और 15वें वित्त आयोग के फंड का गलत उपयोग – इन सभी पर लिखते हुए मुझे समाज में बदलाव की आवश्यकता का अहसास हुआ।

"सिर्फ वही लोग समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, जो खुद समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार होते हैं।" यह विचार काला पंचायत की राजनीति पर लिखते समय मेरे मन में आया। पंचायत राजनीति की जटिलताओं और वहां की घटनाओं पर मैंने कई ब्लॉग लिखे, जहां तक पहुँचने के लिए मेहनत और साहस की आवश्यकता थी।

सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और सुरक्षा उपायों की कमी पर भी मैंने अपने विचार व्यक्त किए। सड़क सुरक्षा को लेकर की गई जागरूकता की आवश्यकता को महसूस करते हुए, मैंने ब्लॉग के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि केवल कानून के पालन से ही हम समाज में बदलाव ला सकते हैं।
2024 में मेरी निजी जिंदगी में भी कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। मेरी छोटी बेटी Kavya का जन्म हुआ, जो अब 8 महीने की हो चुकी है, और मेरी बड़ी बेटी Navya, जो अब 3 साल की हो चुकी है, ने इस साल बहुत कुछ सीखा। यह समय मेरे लिए परिवार और बच्चों के साथ बिताने का था, जहां मैंने यह समझा कि बच्चों के साथ बिताया हर पल अनमोल होता है। "बच्चों में वह ताकत होती है, जो हमें जीवन की असली अर्थ सिखाती है," यह सोचते हुए मैंने इस साल को "सीखने का साल" नाम दिया।

2024 ने मुझे खेती के बारे में भी बहुत कुछ सिखाया। धान, गेहूं, सरसों और आलू जैसी फसलों की खेती और उनके वैज्ञानिक तरीकों से जुड़े अनुभवों ने मुझे यह समझाया कि किसान भी अब विज्ञान और तकनीक को अपने काम में शामिल कर रहे हैं। यह बदलाव और प्रगति मेरे लिए एक प्रेरणा का स्रोत बने।

आज मेरी माँ की पुण्यतिथि भी है, और यह दिन मुझे उन सभी यादों से जोड़ता है, जो उन्होंने मुझे जीवन में सिखाईं। वह हमेशा कहती थीं, "अपने कर्मों से दुनिया को बदलो, क्योंकि जो तुम सोचते हो, वही तुम बन जाते हो।" इस विचार ने मुझे जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

नए मित्रों से मिलने का भी यह वर्ष एक महत्वपूर्ण पल था। मैंने VFX से बाहर के लोगों के साथ नए संबंध बनाए – वकील, आईएएस अधिकारी और अन्य पेशेवरों से, जिन्होंने मुझे समाज की सच्ची स्थिति और इसके बदलाव के बारे में बताया।

2024 ने मुझे यह समझने का अवसर दिया कि जीवन केवल अपने लिए नहीं है, बल्कि समाज और दूसरों के लिए भी है। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, "आपको खुद में वह परिवर्तन बनना होगा, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।" यही विचार 2024 में मेरी यात्रा का मार्गदर्शक रहा।

जैसे ही हम 2025 की ओर बढ़ते हैं, मैं उम्मीद करता हूँ कि यह नया वर्ष हमारे लिए और हमारे समाज के लिए और भी अधिक सृजनात्मकता, साहस, और बदलाव लेकर आएगा। इस वर्ष के लिए मेरे मन में एक उद्धरण है, "सफलता सिर्फ उन लोगों को मिलती है जो खुद पर विश्वास करते हैं और कभी हार नहीं मानते।"

आप सभी को नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएँ, और आशा है कि हम इस नए साल में अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

Sunday, December 29, 2024

अतिक्रमण के बहाने से जिम्मेदारी से बचने पर उठाए सवाल

प्रिय किसान साथियों,

आज मैंने पटना में मंत्री अप्त सचिव/प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार से मुलाकात कर आपकी समस्याओं को मजबूती से उनके सामने रखा। महात्मा गांधी ने कहा था, "जो बदलाव आप दुनिया में देखना चाहते हैं, उसे सबसे पहले खुद में लाएं।" इस भावना के साथ, मैंने आपकी आवाज को उठाने और आपकी समस्याओं का समाधान तलाशने का प्रयास किया।

मैंने पईन की भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों के बारे में सवाल किया। अब तक सिंचाई विभाग ने इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी है, जिससे किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मैंने मांग की कि यह दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसानों को अपनी जमीन और उससे जुड़े फैसलों की जानकारी हो सके।

मैंने जमुई में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा बार-बार अतिक्रमण का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर भी सवाल खड़े किए। वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच और इस मुद्दे पर किसानों के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। महात्मा गांधी का कहना था, "सत्य ही ईश्वर है।" इस सच्चाई की तलाश में मैंने आग्रह किया कि किसानों को उनकी मेहनत का सही फल मिल सके।

किसानों के नुकसान की भरपाई पर भी मेरी चर्चा हुई। जल की कमी और बढ़ते खर्चों ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। मैंने इस पर ठोस कदम उठाने और किसानों को राहत देने की मांग की। जब खेतों में पानी नहीं होगा, तो मेहनत का फल कैसे मिलेगा? किसानों के जीवन में खुशी और स्थिरता लाने के लिए विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

मैंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ आपकी समस्याओं को सामने रखा है। यह संघर्ष जारी रहेगा, और अगर समाधान नहीं मिलता, तो इसे उच्च स्तर पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। महात्मा गांधी के शब्दों में, "संघर्ष में ही शक्ति निहित होती है।" आइए, हम सभी संगठित होकर अपनी लड़ाई जारी रखें।

आपका
प्रमोद पांडे
कला पंचायत

Saturday, December 28, 2024

लाइव कमेंट्री: जमुई लक्ष्मीपुर ब्लॉक के PACS धान खरीद केंद्र से गवास्कर स्टाइल में रिपोर्टिंग

"नमस्कार दोस्तों! हम आए हैं जमुई,लक्ष्मीपुर के धान क्रय मैदान पर, जहां किसानों की मेहनत का खेल जारी है। यहां के PACS खरीद केंद्र बिल्कुल क्रिकेट के पिच की तरह प्रदर्शन कर रहे हैं। तो आइए, जानते हैं किसने मारी चौका और कौन आउट होकर पवेलियन लौट गया!

अनंतपुर PACS से शुरुआत करते हैं। भाईसाब, यहां का प्रदर्शन ऐसा है जैसे बैट्समैन पहली गेंद पर डक मार गया हो। सिर्फ 1 किसान, और 0.800 मेट्रिक टन। इसे कहेंगे स्लो स्टार्ट!

अब आते हैं चिनवारिया और डिघी की जोड़ी पर। दोनों ने एक जैसे शॉट मारे हैं—42.700 मेट्रिक टन। यह तो बिलकुल 22 गज की सटीक साझेदारी जैसा है। लेकिन रनों में तेजी की कमी साफ दिख रही है।

गऊरा और हरला ने थोड़ा जोश दिखाया है। गऊरा ने 103 मेट्रिक टन का शानदार सिक्सर मारा, वहीं हरला ने 95.200 मेट्रिक टन के साथ कवर ड्राइव लगाई है।

काकन चौर तो ऐसा खेल रहा है जैसे बॉल सिर्फ देख रहा हो—42.700 मेट्रिक टन। कोई जल्दी नहीं, भाईसाब, आराम से खेलो!

अब काला PACS की बात करें, तो इन्होंने 73.400 मेट्रिक टन का प्रदर्शन किया। यह रन रेट ठीक-ठाक है, लेकिन दर्शक और ज्यादा चाहते हैं।

मरैया ने 85.400 मेट्रिक टन का रन बनाया है। इसे कहेंगे सिंगल्स और डबल्स का मैच। मटिया ने तो 143.200 मेट्रिक टन का धमाकेदार चौका जड़ा है। वाह, यह तो मैच का स्टार लग रहा है!

मोहनपुर का स्कोर भी शानदार है—677.700 मेट्रिक टन। दोस्तों, यह तो टेस्ट मैच में भी सेंचुरी मारी है!

अब आते हैं नबाबंद, जिसने 148.000 मेट्रिक टन के साथ क्रीज पर मजबूती से टिके रहने की कोशिश की। और आखिर में पिडरौन, जिसने सबसे बड़ा छक्का मारा—152.900 मेट्रिक टन। यह तो मैच का विनर लग रहा है!

और अब एक चौंकाने वाली बात!
पूरा स्कोर देख लीजिए, 1001.600 मेट्रिक टन धान तो आ चुका है, लेकिन राइस मिल का गेट अभी तक बंद है। भाई, गेंद तो बाउंड्री के बाहर जा रही है, लेकिन रन रिकॉर्ड करने वाला स्कोरर कहां गायब है?

तो दोस्तों, PACS का यह मैच जारी है। उम्मीद करते हैं कि अगले ओवर में धान राइस मिल पहुंचे और CMR भी आ जाए। तब तक देखते रहिए, गवास्कर स्टाइल में यह कमेंट्री!"

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
यह छवि और जानकारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा जनरेट की गई है और इसका उपयोग केवल रचनात्मक और सांकेतिक उद्देश्यों के लिए किया गया है।
इस छवि में प्रदर्शित आंकड़े PACS वेबसाइट से लिए गए हैं और इन्हें सत्यापित डेटा का प्रतिनिधित्व माना जाना चाहिए।
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Friday, December 27, 2024

काला पंचायत में धान बेचने के लिए पंजीकृत किसानों की सूची


काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई जिला, बिहार में इस वर्ष कई किसान अपनी धान की फसल को उचित मूल्य पर बेचने के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं। ये किसान PACS (Primary Agricultural Credit Society) केंद्र के माध्यम से अपनी फसल बेचने के लिए तैयार हैं, हालांकि वे MSP (Minimum Support Price) और पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में कुछ भ्रमित महसूस कर रहे हैं। पंचायत केंद्रों पर MSP की स्पष्ट जानकारी न होने के कारण, किसानों को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

यहां उन किसानों की सूची दी जा रही है जो काला पंचायत के PACS में पंजीकृत हैं और धान बेचने के लिए तैयार हैं:

1. जय नारायण प्रसाद - हरि नारायण प्रसाद


2. आनंद कुमार पांडे - कपिलदेव पांडे


3. दिनदयाल पंडित - मिश्री पंडित


4. वीरेंद्र पांडे - भुनेश्वर पांडे


5. प्रकाश टांटी - स्व. लखन टांटी


6. नवीन कुमार सिन्हा - बालेश्वर प्रसाद


7. विपिन सिंह - योगेंद्र सिंह


8. राजेश साह - गणेश साह


9. महेंद्र प्रसाद यादव - माले प्रसाद यादव


10. पारसुराम पंडित - मिश्री पंडित


11. सुनीता देवी - श्याम सुंदर पंडित


12. फुलेश्वर पंडित - केवाल पंडित


13. मनोज यादव - नगेश्वर यादव


14. मंजू देवी - भरत रावत


15. सुंदर सिंह - हरि सिंह


16. भुनेश्वर यादव - गोविंद यादव


17. प्रमेेश्वर यादव - गोविंद यादव


18. जीतेन्द्र यादव - अकलू यादव


19. वकील पंडे - मथुरा पंडे


20. वीरबहादुर रावत - भुनेश्वर रावत


21. शकुंतला देवी - उपेन्द्र यादव


22. त्रिलोकि पासवान - रोहन पासवान


23. ब्रह्मदेव प्रसाद यादव - माले प्रसाद यादव


24. सरिता देवी - गणेश प्रसाद साह


25. जनार्दन सिंह - अंबिका सिंह


26. साजन पांडे - यादवनंदन पांडे


27. प्रल्हाद पासवान - फुसुरू पासवान


28. साहदेव साह - रामचरण साह


29. रामविलाश सिंह - मथुरा सिंह


30. मुनेश्वर शर्मा - बंगाली शर्मा


31. नंदू कुमार यादव - नगेश्वर यादव


32. चिंता देवी - महेश मंडल


33. दिनेश साह - धातुरी साह


34. मुकेश कुमार - साहदेव प्रसाद यादव


35. चिरंजीवी यादव - महेंद्र यादव


36. रंधीर यादव - जोतिश यादव


37. मनोज ठाकुर - बसुदेव ठाकुर


38. राजेश कुमार सिंह - महेंद्र प्रसाद मंडल


39. बाबन रावत - नगेश्वर रावत


40. राजकुमार पासवान - देवी पासवान


41. अरुण पांडे - गंगाधर पांडे


42. भिखारी यादव - भासो यादव


43. शिवल साह - करु साह


44. सुनील कुमार यादव - नांकेश्वर यादव


45. अंबालिका कुमारी - प्रमोद कुमार पांडे


46. बिनोद प्रसाद - चंद्र मौलेश्वर प्रसाद


47. प्रमोद कुमार पांडे - आदित्यन नारायण पांडे


48. गोनिका देवी - निरो यादव


49. इंद्रदेव यादव - जानी यादव


50. रामदेव पंडित - मिश्री पंडित


51. अनिल पांडे - मथुरा पांडे


52. सुबोध पांडे - सोदागर पांडे


53. संतोष कुमार सिंह - उमाशंकर सिंह


54. वीरेंद्र पांडे - चंचुन पांडे


55. ललु सिंह - सत्यनारायण सिंह


56. रूपा कुमारी - बाशिष्ठ कुमार पासवान


57. कृष्ण साह - जितन साह


58. मिथलेश पांडे - सुबोध पांडे


59. दिनकर कुमार - राम विलास सिंह


60. सोनू कुमार - दिनेश साह


61. मनोज कुमार - श्रीनाथ प्रसाद यादव


62. नंदलाल यादव - माणिक यादव


63. गुंजन कुमार पांडे - वकील पांडे


64. नेहा कुमारी - बसंत कुमार पंडित


65. यमुन यादव - भागीरथ यादव


66. शंकर शर्मा - मिसरी शर्मा


67. सुंदर कुमार - रासिक पासवान


68. सुलोचना देवी - उपेन्द्र पांडे


69. संजो कुमार सिंह - योगेंद्र सिंह


70. आशीष कुमार - सुरेन्द्र प्रसाद यादव


71. उमेश पासवान - देवी पासवान


72. रामेश्वर यादव - बाबू राम यादव


73. सुशीला पांडे - लखन पांडे


74. साबिया देवी - नरेश यादव


75. आंदानी साह - शिबु साह


76. हिरदेश कुमार - साहदेव प्रसाद


77. बिमला देवी - सरोज प्रसाद


78. दिवाकर पांडे - स्व. लखन पांडे


79. योगेंद्र सिंह - हरि सिंह


80. रामरतन प्रसाद - राज किशोर प्रसाद


81. बब्लू कुमार पासवान - तारणी पासवान


82. करीमाम यादव - लट्टू यादव


83. नौरंगी पासवान - लीला पासवान


84. उदय यादव - रंधीर यादव


85. गौतम कुमार - सदानंद पांडे


86. दिनेश कुमार पांडे - कमलेश्वरी पांडे


87. अमित कुमार - नंदन पांडे


88. अंजनी यादव - गैवी यादव


89. दीवार कुमार - श्री सूर्यनारायण मंडल


90. शंभू शरण सुमन - अंबिका प्रसाद यादव


91. बचिया देवी - बच्चन पंडित


92. हेमा देवी - सुंदर शर्मा


93. कपिलदेव पांडे - माखो पांडे


94. रवि कुमार - महेश मंडल


95. नागेंद्र कुमार पासवान - देवकी पासवान


96. गीरा देवी - गौतम पासवान


97. राजू कुमार सिंह - योगेंद्र सिंह


98. रतन पांडे - यादवनंदन पांडे


99. साहदेव प्रसाद यादव - पंचम यादव


100. रंजी देवी - सुमित पासवान


101. निरंजन रावत - नगेश्वर रावत


102. सीमा देवी - जितेंद्र पासवान



यह सूची उन किसानों की है जो अब तक काला पंचायत के PACS केंद्रों में पंजीकृत हो चुके हैं और अपनी धान की फसल बेचने के लिए तैयार हैं। हालांकि, किसानों को MSP और पंजीकरण की प्रक्रियाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचायत केंद्रों पर इस संबंध में अधिक जागरूकता और जानकारी का प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि किसान सही समय पर और सही मूल्य पर अपनी फसल बेच सकें।

अस्वीकरण

यह जानकारी सरकारी वेबसाइट और संबंधित स्रोतों से संकलित की गई है। सूची में शामिल किसानों की पंजीकरण स्थिति, MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य), और प्रक्रिया से संबंधित विवरण पूर्णत: सत्यापन के अधीन है। इस जानकारी को साझा करने का उद्देश्य किसानों को मार्गदर्शन प्रदान करना है, लेकिन उपयोगकर्ता इसे केवल सूचना के उद्देश्य से ही देखें।

हम सटीकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन किसी भी त्रुटि, अद्यतन में बदलाव, या इसके उपयोग से उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे। कृपया अंतिम निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों या संबंधित विभाग से पुष्टि करें।



Thursday, December 26, 2024

सूचना बोर्ड का अभाव और जर्जर भवन: काला पंचायत के पैक्स केंद्र की हकीकत

लक्ष्मीपुर तालुका के जमुई जिले में स्थित काला पंचायत का पैक्स केंद्र आज अपनी बदहाली और अव्यवस्था के कारण किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह केंद्र सहकारिता विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण है।

इस केंद्र से अब तक केवल 9 किसानों का धान खरीदा गया है। यहां सूचना बोर्ड का पूरी तरह अभाव है, जो किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। न ही यहां कोई निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी है और न ही धान के रेट की कोई स्पष्टता। किसान मोबाइल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर पूछकर जानकारी जुटाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल परेशान करती है बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।

केंद्र का भवन जर्जर हालत में है, जहां फर्श टूटे हुए हैं और संरचना कमजोर दिखती है। किसानों ने यह भी बताया कि केंद्र पर कर्मचारी अक्सर गायब रहते हैं। यह व्यवस्था किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही है और गड़बड़ियों की संभावना को और बढ़ा रही है।

वहीं दूसरी ओर, सहकारिता विभाग सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियों की तस्वीरें और रिपोर्ट साझा करने में व्यस्त है। दरभंगा और अन्य स्थानों पर धान अधिप्राप्ति कार्य के निरीक्षण की खबरें खूब प्रचारित हो रही हैं, लेकिन काला पंचायत के इस केंद्र की हकीकत से यह प्रचार एकदम विपरीत है।

यह केंद्र लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अव्यवस्था और जानकारी के अभाव ने इसे उनके लिए सिरदर्द बना दिया है। किसानों ने बातचीत में यह भी कहा कि यहां हर कदम पर असुविधा होती है, और उन्हें लगता है कि धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है।

इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। सहकारिता विभाग को इस केंद्र का निरीक्षण कर यहां की व्यवस्थाओं में सुधार लाना चाहिए। सूचना बोर्ड, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, और केंद्र की आधारभूत संरचना में सुधार किसानों के हित में जरूरी है।

यह समय है कि सोशल मीडिया पर दिखावे से बाहर आकर प्रशासन वास्तविक समस्याओं का समाधान करे और किसानों के लिए काम करे। काला पंचायत का पैक्स केंद्र एक आदर्श केंद्र बन सकता है, बशर्ते इसे सही दिशा और ध्यान मिले।

लेखक: प्रमोद कुमार पांडेय

अस्वीकरण:
इस लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और जानकारी पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन और संबंधित विभाग का ध्यान वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। इसमें कही गई बातें पूर्णतः सत्यता की गारंटी नहीं देती हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे स्वतंत्र रूप से तथ्यों की जांच करें। लेखक किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या विवाद के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।



लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला पंचायत की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई


आज मैं अकेले जमुई DM कार्यालय के गेट पर खड़ा था, जहां लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला पंचायत से जुड़े किसानों की समस्याओं को उठाना मेरा मुख्य उद्देश्य था। बैठक खत्म होने के बाद कई मंत्री और जिला अधिकारी बाहर निकले। मीडिया के लोग वहां मौजूद थे और उनसे सवाल-जवाब कर रहे थे। मैंने भी इस मौके का फायदा उठाते हुए श्री दामोदर रावत, जो झाझा विधानसभा क्षेत्र से हमारे विधायक हैं, से काला पंचायत PACS केंद्र में धान खरीद से जुड़ी अनियमितताओं और लघु जल संसाधन विभाग, जमुई से जुड़ी पानी की समस्याओं पर अपनी बात रखी।

मैंने उन्हें बताया कि कैसे PACS केंद्र में फर्जी रिकॉर्ड बनाकर किसानों को उनके धान का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। असली किसान अभी भी अपने धान को MSP पर बेचने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में दिखाया गया है कि धान पहले ही बिक चुका है। दूसरी ओर, धारधारिया डैम की दूसरी पैन में पानी की आपूर्ति बाधित होने से लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला पंचायत किसान महंगे डीजल पंप का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

मीडिया के लोगों ने इन मुद्दों को ध्यान से सुना और श्री दामोदर रावत से भी इस पर प्रतिक्रिया ली। मुझे उम्मीद है कि मीडिया मेरी आवाज को भी उठाएगा और इसे व्यापक स्तर पर प्रशासन तक पहुंचाएगा।

यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला पंचायत के हर उस किसान की लड़ाई है जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। हमारा प्रयास है कि इन समस्याओं का समाधान निकले और किसानों को उनका हक और सम्मान मिले। विधायक श्री दामोदर रावत का ध्यान इन समस्याओं की ओर आकर्षित करना एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि झाझा विधानसभा क्षेत्र के किसान न्याय पा सकें।

अस्वीकरण...

इस ब्लॉग में प्रस्तुत जानकारी लेखक के निजी अनुभवों और विचारों पर आधारित है। यहां दी गई जानकारियों का उद्देश्य केवल जागरूकता और जानकारी साझा करना है। हालांकि, इसमें दी गई सामग्री की सटीकता और पूर्णता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है, लेकिन लेखक या प्रकाशक किसी भी त्रुटि, चूक, या इससे होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

पाठकों से अनुरोध है कि वे दी गई जानकारी को अपनी समझदारी और विवेक से इस्तेमाल करें। किसी भी कानूनी, प्रशासनिक, या व्यक्तिगत निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञों से सलाह लेना उचित होगा। इस ब्लॉग में उल्लेखित व्यक्तियों, संगठनों, या स्थानों का नाम केवल संदर्भ के उद्देश्य से लिया गया है और इनसे किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं की जाती है।

नोट: इस ब्लॉग में उपयोग की गई छवियाँ AI द्वारा उत्पन्न की गई हैं।