Thursday, October 31, 2024

पहली कलाकारी: मेरी तीन साल की बेटी द्वारा सजाया गया दीपक


बच्चों की पहली कलाकारी हमेशा खास होती है, खासकर जब उनके नन्हे हाथों में रंगों का जादू बिखेरने का पहला मौका हो। मेरी तीन साल की बेटी नव्या ने इस दिवाली पर अपने पहले दीपक को रंगों से सजाया और यह मेरे लिए एक अनमोल पल बन गया। उसके मासूम हाथों से बनाई गई इस कृति में न केवल रंगों का संगम है, बल्कि उसमें उसके पापा के साथ बिताए समय की भी खूबसूरत झलक है।

हमने सबसे पहले उसे रंगों के बारे में समझाया, कि कैसे हर रंग अपनी एक खासियत रखता है और हमारे जीवन में खुशियाँ बिखेरता है। उसने बड़ी मासूमियत से अपने पसंदीदा रंग चुने – पीला, हरा, और लाल। फिर उसकी छोटी-छोटी उँगलियों ने जब दीपक को छूना शुरू किया, तो उस पर उसके बचपन की मासूमियत और खूबसूरती उभर आई। हर बार जब उसने एक रंग को दीपक पर लगाया, उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान देखते ही बनती थी।

यह दीपक सिर्फ एक साधारण कलाकारी नहीं है; यह उस वक्त का प्रतीक है जब एक पिता अपनी बेटी के साथ उसके पहले रचनात्मक प्रयास में शामिल हुआ। यह पल हम दोनों के लिए अनमोल है। इस दीपक की हर एक रंग की छाप हमारी उस साझी यात्रा को दर्शाती है, जहाँ हम दोनों ने मिलकर एक यादगार स्मृति बनाई।

इस दीपावली पर यह दीपक हमारे घर के आँगन को रोशन करेगा, साथ ही हमारी यादों को भी हमेशा के लिए अमर बना देगा।

Wednesday, October 30, 2024

बिहार लोक शिकायत निवारण प्रणाली: जमुई में असफलता

बिहार लोक शिकायत निवारण प्रणाली का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, लेकिन जमुई में यह प्रणाली अपने उद्देश्यों को पूरा करने में असफल साबित हो रही है। मैंने काला पंचायत के धरदरिया केनाल में पानी से संबंधित मुद्दे के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। मेरी शिकायत संख्या अनन्य संख्या-999880116082481579 है, जो 76 दिनों से लंबित है, जबकि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम के अनुसार शिकायत का समाधान 60 दिनों के भीतर होना चाहिए।

इस लंबित शिकायत का मुख्य कारण लक्ष्मीपुर के सी.ओ. द्वारा अतिक्रमण रिपोर्ट लोक शिकायत अधिकारी या बिहार के लघु जल संसाधन विभाग को समय पर प्रस्तुत न करना है। यह देरी प्रशासनिक लापरवाही का परिचायक है, क्योंकि मेरे द्वारा बार-बार अनुसरण करने के बाद भी शिकायत का समाधान नहीं हो सका है।

आज तक मुझे जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय, जिला जमुई से केवल नई सुनवाई तिथि मिल रही है, जबकि वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। यह न केवल जनता के प्रति प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि यह बिहार लोक शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े करता है।

इस प्रकार, जमुई के लोगों की समस्याओं का समाधान समय पर न होने के कारण यह प्रणाली मात्र एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
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काला पंचायत में मनरेगा के माध्यम से तेज़ी से विकास कार्यों की शुरुआत – जल स्रोतों के पुनर्भरण और नई परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ी


काला पंचायत, लक्ष्मीपुर (जमुई) में विकास की दिशा में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत यहाँ तेजी से कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई है, जिनमें तालाब निर्माण, जल निकासी व्यवस्था और जल संसाधनों के पुनर्भरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। पंचायत के हर क्षेत्र में विकास की यह गति देखकर स्थानीय लोग भी उत्साहित हैं।
तालाब निर्माण और जल पुनर्भरण
पंचायत में नए तालाबों का निर्माण किया जा रहा है, जो न केवल ग्रामीण रोजगार प्रदान करेगा बल्कि भूजल स्तर को भी सुधारने में मदद करेगा। इन तालाबों से वर्षा जल का संचय किया जाएगा, जो भविष्य में पेयजल की समस्या को हल करने में सहायक सिद्ध होगा।
जल निकासी व्यवस्था का उन्नयन
गांवों में जल जमाव और गंदगी की समस्या को दूर करने के लिए जल निकासी व्यवस्था को उन्नत बनाया जा रहा है। नई ड्रेनेज प्रणाली से वर्षा के दौरान जल भराव की समस्या का समाधान होगा और गांव की सड़कों पर सफाई बनी रहेगी।
अन्य विकास परियोजनाएँ
इसके अलावा, पंचायत में मनरेगा के अंतर्गत कई अन्य परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। इनमें  हरियाली बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण, और जल पुनर्भरण प्रणाली को और मजबूत बनाना शामिल है। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य काला पंचायत को एक सशक्त और आत्मनिर्भर पंचायत के रूप में विकसित करना है।
काला पंचायत का यह तेज़ी से होता विकास हमें यह यकीन दिलाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा जैसी योजनाएँ एक नई क्रांति ला सकती हैं। जल स्रोतों के पुनर्भरण और आधारभूत संरचना के उन्नयन से यहाँ की समस्याओं का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है।
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मनरेगा योजना से निर्मित जीविका भवन, प्रखंड लक्ष्मीपुर (जमुई)



महात्मा गांधी ने कहा था, “भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है।” इस विचार को साकार करते हुए, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत लक्ष्मीपुर प्रखंड में जीविका भवन का निर्माण किया गया है। बिहार ग्रामीण विकास विभाग और जिला प्रशासन जमुई के प्रयासों से निर्मित यह भवन ग्रामीण समुदायों में विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भवन न केवल रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि महिलाओं के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता को भी प्रेरित कर रहा है।

जीविका भवन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव लाना है। यहाँ स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय प्रबंधन, नई तकनीकी जानकारी, और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार व समुदाय का सहारा बन सकें। गांधीजी के गाँव-केंद्रित विकास के सिद्धांत पर चलते हुए, यह भवन एक सामुदायिक केंद्र के रूप में उभरा है जहाँ महिलाएँ अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही हैं।

लक्ष्मीपुर प्रखंड का यह जीविका भवन, बिहार ग्रामीण विकास विभाग, जिला प्रशासन जमुई और जीविका बिहार के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है। यह भवन ग्रामीण सशक्तिकरण का प्रतीक है और गांधीजी के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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Monday, October 28, 2024

लक्ष्मीपुर तालुका की मेडिकल सेवाएं: सुप्रीम कोर्ट के आदेश और ड्रग्स एक्ट के नियमों का पालन अनिवार्य


लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई जिले बिहार में केवल 17 कैमिस्ट शॉप्स हैं, जो स्थानीय समुदाय की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। काला पंचायत में तीन प्रमुख अधिकृत मेडिकल शॉप्स हैं:

  1. मनोज मेडिकल हॉल (JM-34/2016)
  2. दीपक मेडिकल हॉल (JM-25/2014)
  3. जनता मेडिकल हॉल (JM-14/2014)

यह जानकारी STATE DRUGS CONTROL ADMINISTRATION, BIHAR से प्राप्त की गई है। ये सभी कैमिस्ट शॉप्स लाइसेंस प्राप्त हैं और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के तहत दवाओं का वितरण करती हैं। इन नियमों के तहत कैमिस्ट शॉप्स को दवाइयों की सुरक्षा, भंडारण, और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय करने की आवश्यकता होती है, ताकि लोगों को मानक के अनुरूप दवाएँ मिल सकें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और महत्वपूर्ण प्रश्न:

सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हर व्यवसाय का दायित्व है कि वह दवाइयों और स्वास्थ्य उपकरणों का वितरण पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी कैमिस्ट शॉप्स को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और IPC के मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

  • दवाइयों का उचित भंडारण: क्या इन शॉप्स में भंडारण मानकों का पालन हो रहा है, जैसे तापमान नियंत्रण और सुरक्षा उपाय?
  • दवाइयों की वैधता और गुणवत्ता: क्या ग्राहकों को दी जाने वाली सभी दवाइयाँ प्रमाणित और वैध हैं?
  • कानूनी दिशानिर्देशों का पालन: क्या ये शॉप्स सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हर दवा की बिक्री में ट्रांसपेरेंसी रख रही हैं और क्या उपभोक्ताओं को बिल प्रदान किया जा रहा है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना, स्थानीय जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

अस्वीकरण:
यह ब्लॉग केवल सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त है, जिसमें STATE DRUGS CONTROL ADMINISTRATION, BIHAR से संबंधित जानकारी भी शामिल है। यह ब्लॉग किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह, चिकित्सा परामर्श, या सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जारी दिशानिर्देशों का विकल्प नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी स्वास्थ्य सेवा से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य पेशेवर से सलाह लें।

इस ब्लॉग में उल्लिखित किसी भी जानकारी की सटीकता या पूर्णता के लिए लेखक उत्तरदायी नहीं है।

Sunday, October 27, 2024

कैनूहट-काला पत्थर रोड पर बालू भंडारण की समस्या और दुर्घटनाओं का खतरा




जमुई जिले के लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कैनूहट-काला पत्थर रोड पर बालू भंडारण की समस्या लगातार बढ़ रही है। यह क्षेत्र खनन विभाग द्वारा अधिग्रहित किया गया है, लेकिन इस सड़क पर करीब 50% हिस्से में बालू फैला हुआ है, जो राहगीरों, खासकर बाइक चालकों के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है। यह बालू का फैला हुआ भंडार दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाता है, जिससे कई लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

इस क्षेत्र के लोगों की गुहार है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार ठेकेदार इस समस्या पर ध्यान दें और बालू को सड़क से हटवाकर इसे सुरक्षित बनाएँ। साथ ही, प्रशासन से निवेदन है कि इस प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए कठोर कदम उठाए जाएँ ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

निवेदन: बिहार खनन विभाग से आग्रह है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सड़क से बालू हटाने की व्यवस्था की जाए और इस रोड को सुरक्षित बनाया जाए।


Saturday, October 26, 2024

जीनहरा प्राइवेट क्लिनिक की बदहाल तस्वीर: स्वास्थ्य या बीमारी का घर?

जमुई लक्ष्मीपुर काला 
जीनहरा का यह प्राइवेट क्लिनिक, जो सरकारी स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र जीनहरा  से केवल 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, एक खतरनाक अस्वच्छता और लापरवाही का गढ़ बन चुका है। यह हर रोज़ लगभग 20 से 30 मरीजों का इलाज करता है, लेकिन यहाँ की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि मानो मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार होकर घर जा रहे हों। दीवारों से लटके ड्रिप के बोतलें, अव्यवस्थित तारें और चारों ओर फैला कचरा किसी डरावने दृश्य का अहसास कराता है, मानो यह कोई क्लिनिक नहीं बल्कि अराजकता का केंद्र हो।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, सभी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की बीमारी फैलने का खतरा न हो। लेकिन जीनहरा का यह क्लिनिक इन नियमों को पूरी तरह से अनदेखा कर रहा है। खुले में पड़े हुए सिरिंज, इस्तेमाल की गई ड्रिप बोतलें, और अन्य चिकित्सा कचरा संक्रमण फैलाने में सहायक बन सकते हैं। यह जगह किसी मरीज के ठीक होने का स्थान कम और संक्रमण का घर ज्यादा प्रतीत होती है।

आईपीसी की धारा 269 और 270 के अनुसार, किसी भी ऐसी लापरवाही को अपराध माना जाता है, जो संक्रमण फैलाने का कारण बन सकती है। धारा 269 उन कृत्यों को कवर करती है जो लापरवाही से किसी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धारा 270 में जानबूझकर किए गए कृत्य शामिल हैं जो संक्रामक बीमारी के फैलाव का कारण बनते हैं। इस तरह के क्लिनिक में स्वच्छता की अनदेखी इन धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन है।
"मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम" के तहत, हर व्यक्ति का यह अधिकार है कि उसे एक सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य सेवा मिले। इस क्लिनिक की भयावह स्थिति स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन इस स्थिति में उन्हें ठीक होने की बजाय और बीमार होने का खतरा बना रहता है।

यह मामला केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक चेतावनी है। विभाग को ऐसे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इस तरह की लापरवाही पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए क्लिनिकों के नियमित निरीक्षण, भारी जुर्माने और आवश्यकता होने पर लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाने चाहिए।

इस क्लिनिक की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूक हैं, या लापरवाही और उदासीनता के बीच अपनी जिंदगी को जोखिम में डालने को मजबूर हैं?

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण का बढ़ता संकट: काला पंचायत में जागरूकता की जरूरत


जमुई (बिहार) – बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण एक गंभीर समस्या बन गई है। हमारे जमुई जिले के लक्ष्मीपुर तालुका के काला पंचायत में भी यह समस्या तेजी से फैल रही है। यहां कई लोग इन मिशनरियों के प्रलोभनों का शिकार होकर अपनी धार्मिक पहचान बदल रहे हैं। बांका जिले के चंदन, कटोरिया, बौंसी और अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह के धर्मांतरण के मामले तेजी से सामने आए हैं।

इस विषय पर कई स्थानीय समाचार पत्र और मीडिया हाउस में रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई हैं, जिनमें धर्मांतरण के मामलों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। 'दैनिक जागरण' की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 2-3 वर्षों में बांका, गया, सारण और अब जमुई के काला पंचायत जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है।

इस समस्या की गंभीरता को समझने के लिए मैंने इस मुद्दे पर काला पंचायत के कुछ लोगों से चर्चा भी की। उन्होंने बताया कि इस धर्मांतरण के पीछे मुख्य रूप से आर्थिक लाभ है, जिसके कारण कुछ लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। हालांकि गोपनीयता बनाए रखने के लिए मैं उनके नाम उजागर नहीं कर सकता। ऐसा प्रतीत होता है कि गरीब और अशिक्षित लोगों को आर्थिक मदद का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
काला पंचायत में लोगों को यह बताया जा रहा है कि उनके धार्मिक ग्रंथों में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं है, और ईसाई धर्म अपनाने से उन्हें विशेष लाभ मिलेगा। बच्चों को मुफ्त शिक्षा और परिवारों को आर्थिक सहायता के वादों के साथ, चर्च उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति में काला पंचायत के लोगों के लिए जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। यह समस्या केवल हमारे पंचायत तक सीमित नहीं है; बल्कि अन्य जिलों में भी तेजी से फैल रही है। काला पंचायत के लोग इन प्रलोभनों से सावधान रहें और अपने परिवार को धर्मांतरण से बचाने के लिए सतर्क रहें।

अस्वीकृति (Disclaimer)
यह लेख बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण की समस्या पर आधारित है, विशेष रूप से काला पंचायत में। इसमें व्यक्त की गई जानकारी विभिन्न स्रोतों और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है। लेखक इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए केवल सूचना प्रदान कर रहा है। किसी विशेष धर्म, जाति, या समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह या पक्षपात का उद्देश्य नहीं है। यह लेख समाज के भीतर जागरूकता बढ़ाने के लिए लिखा गया है और किसी भी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को आहत करने का इरादा नहीं रखता। पाठक इस लेख में दिए गए तथ्यों और विचारों पर स्वतंत्र रूप से विचार करने के लिए आमंत्रित हैं।



Friday, October 25, 2024

काला पंचायत में पंचायत कार्यालय निर्माण कार्य का शुभारंभ


प्रिय काला पंचायत के सभी सदस्यों,
जमुई लक्ष्मीपुर: हम सबके लिए यह खुशी की बात है कि हमारे पंचायत कार्यालय का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने जा रहा है। आज काला पंचायत के जिनहरा गांव में भूमि का माप लिया गया, जहां नया कार्यालय भवन बनेगा। इस खुशी के अवसर पर, कुछ लोग इस निर्माण के प्रति असंतोष जता रहे हैं। उनके अनुसार, यह कार्यालय भवन काला गांव में पुराने भवन की जगह बनना चाहिए था, लेकिन यह कार्य जिनहरा गांव में शुरू होगा।

साथियों, कभी-कभी परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं होतीं। भूमि आवंटन में भी कई तरह की चुनौतियाँ होती हैं, और कुछ राजनीतिक लोग इस मुद्दे पर अपनी सियासी रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि यह कार्य पंचायत के सभी लोगों के लाभ के लिए हो रहा है।

क्या आपने देखा कि हमारे पंचायत के हर वार्ड में अपना आंगनवाड़ी केंद्र है, लेकिन उन केंद्रों की बैठने और पर्यावरणीय स्थिति मानकों के अनुरूप नहीं है। क्या यह जरूरी नहीं है कि हम इस पर ध्यान दें और इसे अपनी प्राथमिकता बनाएं? जब हर वार्ड की सड़कों और नाली व्यवस्था खराब हालत में है, तो क्यों न हम इस पर ध्यान दें, बजाय कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने के जिनका असल में जनहित से कोई लेना-देना नहीं है।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए मासूम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। राजनीति करने का सही तरीका यह है कि हम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दें, न कि अपने स्वार्थों को। हम सभी जानते हैं कि यह मुद्दा जनता की सेवा करने का है, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ का।
हमने आपको वोट दिया है, आपकी जिम्मेदारी है कि आप हमारी समस्याओं को समझें और उनका समाधान करें। हर एजेंडा महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही प्राथमिकता तय करना आवश्यक है ताकि हम सबकी भलाई हो।
आइए, हम सब मिलकर इस निर्माण कार्य का समर्थन करें और अपनी पंचायत के विकास के लिए एकजुट हों।

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Thursday, October 24, 2024

धान की खरीद नवंबर से होगी शुरू - किसानों के लिए बड़ी खबर!


जमुई में इस वर्ष 2024-25 के खरीफ विपणन मौसम में धान की अधिप्राप्ति प्रक्रिया नवंबर से शुरू होने जा रही है। साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड ‘ए’ धान का 2320 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो कि किसानों के लिए लाभकारी मूल्य है। यह कदम सरकार की ओर से किसानों की आय में सुधार और उनके उत्पादों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पंजीकरण का महत्व और प्रक्रिया
जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि केवल पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in पर पंजीकृत किसानों से ही धान की खरीद की जाएगी। यह पंजीकरण प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो चुकी है, और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करें। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी पात्र और इच्छुक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है ताकि उन्हें धान बिक्री में कोई परेशानी न हो।
क्रय केन्द्रों पर सुविधाएं और नई व्यवस्थाएं
धान की गुणवत्ता की जांच के लिए सभी क्रय केन्द्रों पर नमी मापक यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही, माप-तौल यंत्रों के नवीनीकरण और सत्यापन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। सभी केन्द्रों पर आधार सत्यापन के लिए बॉयोमेट्रिक फिंगर स्कैनर लगाए जाएंगे, जिससे किसानों की पहचान में पारदर्शिता बनी रहे।
भंडारण और ढुलाई पर विशेष ध्यान
सीएमआर (धान से बने चावल) के भंडारण के लिए सभी गोदामों की जिओ टैगिंग की जाएगी, जिससे भंडारण और अधिप्राप्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही, धान और चावल की ढुलाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों में जीपीएस की व्यवस्था की जाएगी ताकि परिवहन की निगरानी की जा सके।
मिलों का सत्यापन और जांच दल की स्थापना
प्रशासन ने राइस मिलों के सत्यापन के लिए जिला स्तर पर जांच दल का गठन करने के निर्देश दिए हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल योग्य मिलों को ही अधिप्राप्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। साथ ही, पैक्स और व्यापार मंडल को अपने अंकेक्षण 2022-23 तक के अद्यतन करने का निर्देश दिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से पूरी की जा सके।
इस नई व्यवस्था से किसानों को अधिक सुविधा और लाभ मिलेगा, जिससे उनकी मेहनत का उचित मोल मिल सकेगा।

न्यूरोलॉजी में DuoMAG XT rTMS: AMT और RMT की सरल जानकारी




आज के समय में, कई नई तकनीकें न्यूरोलॉजी यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मदद कर रही हैं। एक ऐसी ही तकनीक है Transcranial Magnetic Stimulation (TMS), जो मस्तिष्क को बिना किसी सर्जरी के, चुंबकीय तरंगों से उत्तेजित करती है। यह खासकर मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों जैसे अवसाद, मिर्गी, और पार्किंसन रोग के इलाज में काम आती है।

TMS के लिए एक बहुत उपयोगी मशीन है DuoMAG XT rTMS सिस्टम, जो मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने और उनका इलाज करने में मदद करती है। इस मशीन के ज़रिए दो मुख्य मापदंड देखे जाते हैं – AMT (Active Motor Threshold) और RMT (Resting Motor Threshold)। आइए, इन्हें सरल शब्दों में समझते हैं।

AMT (Active Motor Threshold) क्या है?

AMT का मतलब है, वह न्यूनतम चुंबकीय शक्ति जो मस्तिष्क में तब काम करती है, जब शरीर की मांसपेशियां किसी काम में सक्रिय होती हैं। इसे मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स में होने वाली गतिविधियों को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

RMT (Resting Motor Threshold) क्या है?

RMT उस न्यूनतम चुंबकीय शक्ति को मापता है, जो मांसपेशियों के आराम की स्थिति में होती है। यह मस्तिष्क की सामान्य उत्तेजना को मापने में मदद करता है।

DuoMAG XT rTMS सिस्टम कैसे काम करता है?

DuoMAG XT मस्तिष्क के खास हिस्सों में चुंबकीय तरंगों से उत्तेजना पैदा करता है। यह तकनीक मस्तिष्क की कुछ समस्याओं को ठीक करने में मदद करती है। इस सिस्टम से AMT और RMT को सही से मापा जा सकता है, जिससे इलाज ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बनता है।

AMT और RMT का महत्व

AMT मांसपेशियों की गतिविधियों को समझने में मदद करता है, जैसे किसी व्यक्ति की मांसपेशियों में ताकत या कमजोरी के इलाज में।

RMT मस्तिष्क की सामान्य स्थिति और उसकी प्रतिक्रिया को मापता है, जैसे मानसिक बीमारियों के इलाज में।


DuoMAG XT rTMS के फायदे

1. गैर-आक्रामक (Non-invasive): बिना किसी सर्जरी के, यह मशीन मस्तिष्क की उत्तेजना को कंट्रोल करती है, जिससे यह सुरक्षित और आसान तरीका है।


2. व्यक्तिगत इलाज: DuoMAG XT से हर मरीज़ के लिए अलग-अलग योजना बनाई जा सकती है, ताकि इलाज अधिक प्रभावी हो।


3. तेज और असरदार: AMT और RMT की सटीक माप के कारण, इलाज जल्दी और बेहतर तरीके से होता है।

निष्कर्ष
DuoMAG XT rTMS सिस्टम न्यूरोलॉजी में एक नई तकनीक है, जो मस्तिष्क के इलाज को सरल और सुरक्षित बनाती है। AMT और RMT के ज़रिए, यह मशीन मस्तिष्क की समस्याओं का सटीक इलाज करती है। अगर आपके परिवार में किसी को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हैं, तो इस तकनीक को आजमाने के बारे में जरूर सोचें।



Monday, October 21, 2024

ब्लॉग शीर्षक: "लक्ष्मीपुर, जमुई: स्कूल वैन की अनदेखी और बच्चों की सुरक्षा"


"अनुशासन ही सच्ची स्वतंत्रता का आधार है।" — डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर

हम सभी अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कठिन परिश्रम करते हैं। उन्हें स्कूल भेजना, उन्हें शिक्षा देना, और अनुशासन सिखाना हमारे कर्तव्यों में शामिल है। लेकिन क्या हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे बच्चों की यात्रा सुरक्षित है?

लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई जिले में एक गंभीर स्थिति सामने आई है। स्कूल वैन (गाड़ी संख्या: BR46B6257) की बीमा समाप्त हो चुकी है और इसकी फिटनेस भी एक्सपायर हो चुकी है। यह हमारे बच्चों के लिए एक गंभीर खतरा है। हमारे स्कूल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में अनुशासन विकसित करना और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाना है।

यह केवल इस वैन का मुद्दा नहीं है; जमुई जिले में कई स्कूल वैन ऐसे हैं जो बिना उचित दस्तावेजों के चल रहे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह न केवल बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि यह स्कूलों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाता है।

मैं इस ब्लॉग में वैन के दस्तावेज़ों की जानकारी का स्क्रीनशॉट संलग्न कर रहा हूँ, ताकि सभी को इस गंभीर समस्या का पता चल सके।

मैं जिला परिवहन अधिकारी, जमुई से निवेदन करता हूँ कि कृपया इस मामले को गंभीरता से लें। यह स्थिति आपके कार्य की गुणवत्ता का प्रतिबिंब है और इसने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह उचित है कि ऐसे वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं? क्या यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें?

स्कूल प्रशासन से अनुरोध है कि वे अपने वाहन के बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र का तुरंत नवीनीकरण करवाएँ। यह केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है।

हम सभी को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए, हम एकजुट होकर अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाएं।

अस्वीकृति:

इस ब्लॉग में दी गई जानकारी केवल जागरूकता बढ़ाने और समाज के सामने महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से है। यह लेखक की व्यक्तिगत राय है और इसमें व्यक्त विचारों का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन को लक्षित करना नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस मुद्दे के संबंध में संबंधित प्राधिकरणों से उचित जानकारी प्राप्त करें और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएँ


Saturday, October 19, 2024

माटिया गांव, लक्ष्मीपुर, जमुई, बिहार में प्रकृति ग्राम: एक आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल



माटिया गांव, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई, बिहार में स्थित "प्रकृति ग्राम" एक अनूठी पहल के तहत गांव को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाने का काम कर रहा है। यहां विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे गांव की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

मसाला उद्योग: ग्रामीणों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

प्रकृति ग्राम में कुटीर उद्योगों के माध्यम से "मसाला उद्योग" की स्थापना की गई है, जो ग्रामीणों, विशेषकर "नेचर दीदी" और "नेचर भैया" को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही यह गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। यहां हल्दी, जीरा, काली मिर्च, धनिया और लाल मिर्च पाउडर का 100% शुद्ध और सस्ता उत्पादन किया जा रहा है। इन मसालों का उपयोग न केवल आर्थिक बचत करेगा, बल्कि यह स्वास्थ्य में सुधार के लिए भी प्रभावी साबित हो रहा है।

नर्सरी: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान

प्रकृति ग्राम ने पौधों की एक नर्सरी भी स्थापित की है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नर्सरी के माध्यम से पर्यावरण हितैषी पौधों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, यहां लकड़ी देने वाले और औषधीय पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण का संरक्षण हो, बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सके।

कार्बो फार्मर: सिंदुवार पत्तियों से आर्थिक लाभ

प्रकृति ग्राम के "कार्बो फार्मर" कार्यक्रम के तहत किसान और मजदूर "सिंदुवार" पौधे की पत्तियों को तोड़कर कंपनियों को बेचकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। इसके साथ ही, यहां बागवानी और खेती में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी में इज़ाफ़ा हो रहा है।

प्रमुख योगदानकर्ता:

अर्जुन मंडल जी: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अर्जुन मंडल जी कृषि, बागवानी और नर्सरी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उनकी ये पहल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान दे रही है।

मुक्ति रानी जी: सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मुक्ति रानी जी सामाजिक पहलों के माध्यम से एक सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रयासरत हैं। उनका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना और उन्हें मुख्यधारा में लाना है।

नंदलाल जी: नदी संरक्षण में विशेषज्ञता रखने वाले नंदलाल जी प्रकृति ग्राम के माध्यम से जल और नदी संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। उनके प्रयास से जलीय पर्यावरण का संरक्षण हो रहा है और स्थानीय जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।

प्रकृति ग्राम के इन प्रयासों ने न केवल पर्यावरण और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए हैं, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। माटिया गांव में इस तरह की पहलें बिहार के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणास्रोत साबित हो सकती हैं।

Friday, October 18, 2024

भारत की बीड़ी उद्योग: आर्थिक योगदान और चुनौतियां


बीड़ी उद्योग भारत में एक प्रमुख पारंपरिक उद्योग है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। हाल के शोध से पता चला है कि इस उद्योग का आर्थिक योगदान सीमित है, लेकिन इसमें लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, खासकर गरीब और कमजोर वर्गों के बीच। हालाँकि, बीड़ी उद्योग में लगभग 4.2 मिलियन लोग काम करते हैं, इसके आर्थिक उत्पादन का हिस्सा भारत की कुल अर्थव्यवस्था का केवल 0.1% है।

बीड़ी उद्योग का संरचना और कामकाज

बीड़ी उत्पादन एक श्रम-गहन प्रक्रिया है, जिसमें अधिकांश कामकाजी महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। बीड़ी रोलिंग का काम ज्यादातर घरों में किया जाता है, जहाँ श्रमिकों को ठेकेदारों द्वारा कच्चा माल दिया जाता है। इस उद्योग में लगभग 90% उत्पादन असंगठित क्षेत्र के तहत होता है।

बीड़ी श्रमिकों की आय बहुत कम होती है। औसतन, एक बीड़ी श्रमिक 300-500 बीड़ियों के रोलिंग के लिए 25 से 30 रुपए प्रति दिन कमाता है। हालाँकि, सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी के तहत बीड़ी श्रमिकों के लिए आधिकारिक दरें अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बीड़ी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी लगभग 150 से 200 रुपए प्रति हजार बीड़ी होती है। लेकिन असंगठित क्षेत्र में अधिकांश श्रमिकों को यह न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल पाती है।

बीड़ी श्रमिकों को काम के घंटे और उत्पादन लक्ष्य के बावजूद कम वेतन मिलता है, और अक्सर ठेकेदारों द्वारा मजदूरी में कटौती की जाती है, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर हो जाती है।

स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव

बीड़ी श्रमिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर इस उद्योग का नकारात्मक प्रभाव है। अध्ययन बताते हैं कि बीड़ी निर्माण में काम करने वाले लोगों को पोस्टरल समस्याएं, सांस की बीमारियां और त्वचा रोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, बीड़ी उद्योग में काम करने वाले लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने को मजबूर हैं।

आर्थिक चुनौतियां और समाधान

बीड़ी उद्योग से जुड़े श्रमिकों को आर्थिक लाभ सीमित है। औसतन, प्रत्येक बीड़ी श्रमिक का वार्षिक आर्थिक उत्पादन केवल 143 अमेरिकी डॉलर है। उद्योग के खिलाफ एक प्रमुख तर्क यह है कि इस पर कर बढ़ाने से गरीबों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों की जीविका पर असर पड़ेगा। लेकिन शोध यह दिखाता है कि उच्च करों से आर्थिक गतिविधियों में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।

शोध से यह भी पता चलता है कि बीड़ी उद्योग पर कर बढ़ाने से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि धूम्रपान में कमी आएगी और स्वास्थ्य में सुधार होगा। भारत में हर साल बीड़ी धूम्रपान से लगभग 1 मिलियन लोग मरते हैं। ऐसे में, इस उद्योग के संकुचन से दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

निष्कर्ष

बीड़ी उद्योग का आर्थिक योगदान अपेक्षाकृत कम है, जबकि इसका स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव बड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए, नीतिगत सुधार और कर संरचना में बदलाव से न केवल सरकार को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि इससे धूम्रपान पर नियंत्रण भी हो सकेगा, जिससे जनसंख्या के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

Monday, October 14, 2024

ब्राह्मण का धन भूलकर भी न खाए"।


महाभारत, जो कि भारतीय धर्म, संस्कृति, और जीवन का एक अद्वितीय महाकाव्य है, हमें श्रीकृष्ण के द्वारा दिए गए अनेक मूल्यवान उपदेशों का साक्षी बनाता है। महाभारत के विभिन्न अध्यायों में श्रीकृष्ण ने धर्म, सत्य, न्याय और मानव मूल्यों को लेकर कई गूढ़ शिक्षाएं दी हैं। इसी क्रम में, उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया था कि "ब्राह्मण का धन भूलकर भी न खाए।" यह उपदेश महाभारत के अनुशासन पर्व, अध्याय 92 में आता है, जहाँ भीष्म पितामह और युधिष्ठिर के बीच संवाद हो रहा है और धर्म की गहरी व्याख्या की जा रही है।

समय और संदर्भ:

यह उपदेश महाभारत के युद्ध के बाद का है, जब कौरव और पांडवों के बीच युद्ध समाप्त हो चुका था। युधिष्ठिर, जो युद्ध के बाद भारी दुख और आत्मग्लानि में थे, भीष्म पितामह से जीवन, धर्म और राजधर्म के बारे में ज्ञान प्राप्त कर रहे थे। यह संवाद उस समय का है जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे, और श्रीकृष्ण स्वयं भी वहाँ उपस्थित थे। श्रीकृष्ण के माध्यम से यह शिक्षा तब दी गई थी, जब युद्ध के बाद युधिष्ठिर को राजा के रूप में अपने कर्तव्यों और नैतिकताओं का बोध कराया जा रहा था। समय काल की दृष्टि से, यह घटना महाभारत युद्ध के अठारहवें दिन के बाद और भीष्म पितामह की मृत्यु से पूर्व घटित होती है, जो कि शीत ऋतु के प्रारंभिक समय में बताई जाती है।

अध्याय 92, अनुशासन पर्व:

इस अध्याय में, भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को राजधर्म और व्यक्तिगत धर्म के विभिन्न आयामों के बारे में विस्तार से समझाया। श्रीकृष्ण, जो इस संवाद में एक मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित थे, ने युधिष्ठिर को यह महत्वपूर्ण चेतावनी दी कि राजा या कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण का धन भूलकर भी न हड़पे। यहाँ "धन" का तात्पर्य केवल भौतिक संपत्ति से नहीं है, बल्कि ब्राह्मण की तपस्या, ज्ञान, और उसके द्वारा अर्जित पुण्य से भी है।

इस उपदेश का अर्थ:

ब्राह्मण को भारतीय समाज में ज्ञान, तपस्या और धर्म के संवाहक के रूप में माना जाता है। वह अपने तप और विद्या के माध्यम से समाज को दिशा देता है और इसका प्रतिफल उसे समाज द्वारा आदर और सम्मान के रूप में मिलता है। श्रीकृष्ण का यह उपदेश ब्राह्मण के धन को हड़पने से मना करता है, क्योंकि यह केवल धन की चोरी नहीं है, बल्कि धर्म और सत्य की अवमानना है।

श्रीकृष्ण इस संदेश के माध्यम से यह भी बताते हैं कि ब्राह्मण का धन किसी भी प्रकार से हड़पने से जीवन में अपयश और अधर्म की वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति न केवल अपने कर्मों का दोषी बनता है, बल्कि उसे अपने अगले जन्मों में भी इस अधर्म का फल भुगतना पड़ता है।

नैतिक और सामाजिक संदेश:

इस उपदेश का गहरा नैतिक संदेश यह है कि हम किसी भी व्यक्ति के धर्म, तप और उसकी मेहनत से अर्जित संपत्ति का अनादर न करें। ब्राह्मण का धन यहाँ प्रतीकात्मक रूप से किसी भी व्यक्ति के परिश्रम और ईमानदारी से अर्जित संपत्ति के लिए प्रयुक्त हुआ है। श्रीकृष्ण इस बात पर बल देते हैं कि अन्यायपूर्ण तरीकों से अर्जित धन न केवल समाज में विघटन लाता है, बल्कि आत्मा को भी दूषित करता है।

महाभारत की यह शिक्षा हमें यह सिखाती है कि धर्म, न्याय और सत्य का पालन करना हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। ब्राह्मण का धन, जो उसके तप और सेवा का फल होता है, उसे हड़पने का प्रयास अधर्म की श्रेणी में आता है।

महाभारत की यह शिक्षा हमें यह सिखाती है कि धर्म, न्याय और सत्य का पालन करना हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। ब्राह्मण का धन, जो उसके तप और सेवा का फल होता है, उसे हड़पने का प्रयास अधर्म की श्रेणी में आता है।

इस प्रकार, महाभारत के अनुशासन पर्व में श्रीकृष्ण का यह उपदेश न केवल उस समय के समाज के लिए प्रासंगिक था, बल्कि आज भी यह हमें सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति की संपत्ति या परिश्रम का अनादर नहीं करना चाहिए। जब हम इस प्रकार के कर्तव्यों का पालन करते हैं, तब ही हम सच्चे अर्थों में धर्म के मार्ग पर चल सकते हैं।

Saturday, October 12, 2024

दशहरा की शुभकामनाएँ और किसानों की उम्मीदें


प्रिय किसान भाइयों और बहनों,

सबसे पहले आप सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ! यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि हर कठिनाई का अंत अवश्य होता है और अच्छाई की जीत निश्चित होती है। इस शुभ अवसर पर हम आपसे जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या पर भी बात करना चाहते हैं।

हमारे कला पंचायत के किसान भाइयों को पैन नंबर 2 में जल प्रवाह की बाधा का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या लघु जल संसाधन विभाग जमुई, बिहार की लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है। जैसे-जैसे रबी सीजन नज़दीक आ रहा है, यह जल संकट और गहरा सकता है, लेकिन हम आशावान हैं कि यह दशहरा आपके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई उम्मीद और समाधान लेकर आएगा। माँ दुर्गा की कृपा से इस बार जल प्रवाह अवश्य शुरू होगा, ताकि आप बिना किसी चिंता के रबी की खेती की तैयारी कर सकें।

माँ दुर्गा की अनंत कृपा पर हमें पूरा भरोसा है कि इस दशहरा पर हर समस्या का अंत होगा, और पैन नंबर 2 में फिर से पानी बहने लगेगा। किसानों का परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता, और इस बार भी माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपके खेतों में जल की कमी नहीं होगी।

माँ दुर्गा का यह मंत्र हमारे भीतर नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार करता है:

"या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

(अर्थात: जो देवी सभी प्राणियों में लक्ष्मी के रूप में स्थित हैं, उनको बार-बार प्रणाम।)

हम माँ दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि वे इस बार अपने आशीर्वाद से न केवल आपके खेतों को जल से भरें, बल्कि इस समस्या को स्थायी रूप से समाप्त करें। लघु जल संसाधन विभाग, जमुई को भी माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त हो, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और पैन नंबर 2 की जल समस्या को जल्द ही सुलझाएं।

किसान भाइयों, आप सभी का परिश्रम और संकल्प ही हमारी असली ताकत है। माँ दुर्गा की कृपा से इस रबी सीजन में आपका हर खेत जल से भरा और हर फसल लहलहाती नज़र आएगी।

इस दशहरा पर माँ दुर्गा आपको शक्ति, समृद्धि और सुख प्रदान करें। जल समस्या का समाधान जल्द होगा, और आपके खेतों में फिर से हरियाली छाएगी।

जय माँ दुर्गा!
जय किसान!



पिछले 48 घंटों में जमुई जिले में दो लोगों की मौत हो चुकी है और 5 से 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

प्रिय पाठकगण,

आप सभी से एक महत्वपूर्ण अनुरोध है कि कृपया हमेशा हेलमेट का उपयोग करें, खासकर जब आप मोटरसाइकिल या दोपहिया वाहन चलाते हैं। पिछले 48 घंटों में जमुई जिले में दो लोगों की मौत हो चुकी है और 5 से 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इन सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण हेलमेट का इस्तेमाल न करना है। यह एक गंभीर समस्या है जिसे हमें तुरंत संबोधित करना होगा।

अक्टूबर से अप्रैल के महीनों के बीच जमुई जिला और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। इसका एक प्रमुख कारण त्योहारों का मौसम है, जब लोग उत्साह और जल्दबाजी में होते हैं और ट्रैफिक बढ़ जाता है। इस समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि सड़क पर छोटी-सी गलती बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

मैं लगातार हमारे दोस्तों और परिवारजनों की तस्वीरें पोस्ट कर रहा हूं जो हेलमेट का उपयोग नहीं कर रहे हैं, ताकि लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके। कुछ लोगों ने अब हेलमेट का उपयोग करना शुरू किया है, लेकिन अब भी बहुत से लोग इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

हेलमेट आपकी जान बचा सकता है। यह कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। हम सभी को यह समझना होगा कि हेलमेट सिर्फ कानून के तहत पहनने के लिए नहीं है, बल्कि यह आपकी सुरक्षा के लिए है। आपका जीवन अनमोल है, और इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आपकी है।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जब भी हम सड़क पर दोपहिया वाहन चलाएं, तो हमेशा हेलमेट का उपयोग करें। दुर्घटनाओं को रोकने का यह सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।

धन्यवाद!

Thursday, October 10, 2024

महिलाओं की अदम्य शक्ति: फ्लाविया टाटा नारडिनी की प्रेरणादायक कहानी

यह तस्वीर हर उस महिला के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने सपनों को जीना चाहती है, चाहे हालात कुछ भी हों। इस तस्वीर में फ्लाविया टाटा नारडिनी, एक वैज्ञानिक, सैकड़ों हाई स्कूल की लड़कियों के सामने अंतरिक्ष और STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) के विषय में बोल रही हैं। उनके साथ उनकी दो बेटियां भी मौजूद हैं – एक उनके हाथों में और दूसरी उनके बगल में गर्व से खड़ी।

फ्लाविया की यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे एक मां और पेशेवर महिला अपने काम और परिवार दोनों के बीच संतुलन बना सकती है। उस दिन बेबीसिटर न होने की वजह से वह अपनी बेटियों को साथ लेकर मंच पर पहुंचीं। उनकी छोटी बच्ची ने उनकी गोद से हटने से इनकार कर दिया और बड़ी बेटी भी इस अवसर का हिस्सा बनने के लिए मंच पर साथ खड़ी रही।

यह सिर्फ एक फोटो नहीं है, बल्कि एक संदेश है कि महिलाओं के पास इतनी क्षमता होती है कि वे किसी भी बाधा को पार कर दुनिया में बदलाव ला सकती हैं। इस तस्वीर ने न केवल वहां उपस्थित सैकड़ों लड़कियों को प्रेरित किया बल्कि फ्लाविया की बेटियों को भी एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया – महिलाएं दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकती हैं।

महिलाओं की इस अदम्य शक्ति और साहस की कहानी हमें याद दिलाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, अगर आपके पास जुनून और हिम्मत है, तो आपको कोई नहीं रोक सकता।

— फ्लाविया टाटा नारडिनी


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ब्लॉग: आगामी विधानसभा चुनाव और किसानों की अनदेखी


बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाताओं को रिझाने में जुट गए हैं। इसी बीच, हमारे काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई के किसान पिछले दो वर्षों से जल संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। चुनावी रैलियों और भाषणों में केवल वादों की भरमार है, परंतु वास्तविक समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं।

हमारे सांसद श्री दामोदर रावत - ज.द.यू., झाझा विधानसभा क्षेत्र, जमुई के एक प्रमुख नेता, हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर का दौरा करने आए और गिद्धौर में जागरण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। फेसबुक पर उनकी उपस्थिति हर दिन नई पोस्ट्स और शुभकामनाओं से भरी रहती है – वे सक्रिय रूप से लोगों का स्वागत करते हैं, बधाइयाँ देते हैं। लेकिन क्या ये डिजिटल सक्रियता ज़मीनी स्तर पर किसी ठोस बदलाव का प्रतीक है?

मेरा सवाल यहाँ से शुरू होता है – चुनाव जीतने के बाद से कितने बार श्री दामोदर रावत जी ने अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए दौरे किए? फेसबुक पर पोस्ट करना एक बात है, लेकिन क्या उनके पास कोई दस्तावेज़ या रिपोर्ट है जो दिखा सके कि उन्होंने कितनी समस्याओं को सुलझाया? क्या उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स में वास्तविक परिवर्तन की झलक मिलती है, या वे बस डिजिटल दुनिया में ही सक्रिय हैं?

हम बिहार के लोग अब दिखावों से थक चुके हैं। हमारे मुख्यमंत्री और सांसद जनता दरबार करते हैं, समस्याओं को सुनते हैं, लेकिन परिणाम? जमीनी स्तर पर कुछ खास बदलाव नहीं दिखता। यह बिहार की कठोर सच्चाई है। डिजिटल पोस्ट्स और राजनीतिक भाषणों से जनता का पेट नहीं भरता। समस्याएँ वही हैं, किसान संघर्ष कर रहे हैं, बेरोज़गारी जस की तस बनी हुई है।

मैं श्री दामोदर रावत जी से अपील करता हूँ कि वे सोशल मीडिया की चमक से बाहर निकलें और अपनी ज़िम्मेदारियों का सामना करें। काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई के किसान गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं – पानी की किल्लत, फसल नुकसान, और बुनियादी सुविधाओं की कमी। यह केवल हमारे पंचायत की नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश की हकीकत है।

अगर आप वास्तव में जनता के नेता हैं, तो ज़मीनी स्तर पर काम करके दिखाएँ। सिर्फ फेसबुक पोस्ट्स से चुनाव जीतना आसान हो सकता है, लेकिन जनता का विश्वास तभी मिलेगा जब उनकी समस्याओं का समाधान होगा। आपके पास अब सत्ता है, कृपया इसका सही इस्तेमाल करें। जनता का विश्वास और समर्थन सोशल मीडिया के पोस्ट्स से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से जीता जाता है।

हमारी यह माँग है – श्री दामोदर रावत जी, गाँवों में आएँ, किसानों की समस्याएँ सुनें और उन्हें हल करने के लिए ठोस कदम उठाएँ।