Thursday, November 7, 2024

काला पंचायत का 'जमीन का खेल': प्रशासन की एक नई एंट्री!



अब इस 'जमीन का खेल' में प्रशासन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है! कागजों पर आदेश जारी हो रहे हैं, कड़ी नजर रखने का दावा किया जा रहा है, और रिपोर्ट बनाने के लिए कुछ अधिकारियों को ‘सख्त निर्देश’ दिए गए हैं। मगर मजेदार बात यह है कि ये निर्देश आते ही यहाँ का खेल और दिलचस्प हो गया है—क्योंकि लोग तो जैसे प्रशासन की नजरें चकमा देने की मास्टरी कर चुके हैं! हर बार जब प्रशासन के कदम बढ़ते हैं, यहाँ के ‘अतिक्रमण योद्धा’ अपनी चाल और तेज कर देते हैं, मानो यह खेल प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच एक रोमांचक 'बिल्ली और चूहे' की दौड़ बन गया है।

सुनिए-सुनिए! 🌟 काला पंचायत में इन दिनों 'जमीन हड़प लो’ का महोत्सव धूमधाम से चल रहा है! लगता है कि हर बंदा अपनी जमीन की लॉटरी का टिकट लिए घूम रहा है, मानो किसी को भी पहले कौन सी जगह कब्जा मिलेगी! अतिक्रमण का जादू इस कदर हावी हो चुका है कि अगर कोई चींटी भी खाली जमीन पर चलती दिख जाए, तो लोग पूछने लगते हैं, "अरे, ये किसकी चींटी है?"

अब तो प्रशासन भी कागजों की तलवारें भांजने में लगा है। कुर्सी पर बैठकर 'अतिक्रमण हटाओ' के आदेश पारित कर दिया, लेकिन जमीन के ये 'महाशूरवीर' कहाँ मानने वाले हैं! प्रशासन के आदेश सुनकर बस एक ठहाका लगाते हैं, जैसे किसी ने चाय में चुटकी भर नमक डाल दिया हो।

पंचायत के कोने-कोने में 'जमीन बचाओ, जमीन हड़प लो' की गुप्त मीटिंग्स हो रही हैं। कोई दाईं ओर से घेरने का प्लान बना रहा है, तो कोई बाईं ओर से घुसपैठ का। मानो हर व्यक्ति जेम्स बॉन्ड की तरह अपने 'मिशन: जमीन पर कब्जा' पर निकला हो! और जैसे ही नया कब्जा मिलता है, एक खुशी का हल्का डांस होता है—मगन होकर पैर पटकते हैं जैसे ‘हाय! जमीन मेरी हो गई।’

इस 'जमीन युद्ध' में कुछ लोग इतने शातिर हैं कि हर कड़ी निगरानी रखते हैं। एक कान से पंचायत का शोर सुनते हैं तो दूसरे कान से अपनी जमीन की 'सीमा रेखा' पर नजरें गड़ाए रहते हैं। कोई पेड़ के नीचे बैठकर कब्जा घोषित कर रहा है, तो कोई झाड़ियों में बैठकर सोच रहा है, "बस ये जमीन मिल जाए, फिर तो सब मेरे नाम!"

अब आप सोच रहे होंगे कि बाकी लोग क्या कर रहे हैं? भाई, वो आराम से तमाशा देख रहे हैं, ठहाके लगा रहे हैं और जमीन पर कब्जे की हर नयी स्ट्रेटजी का मजा ले रहे हैं। चाय की दुकानों पर यही चर्चा चल रही है, मानो यह पंचायत का ओलंपिक हो और हर कोई अपने-अपने फेवरेट 'खिलाड़ी' की बड़ाई कर रहा हो।

और हाँ, यहाँ का नियम भी बड़ा मजेदार है—रविवार की सफाई! हफ्ते भर में जो-जो कांड हुए हैं, उनकी पोल हर रविवार खुलती है। गली-मोहल्लों में चर्चाओं का महासागर उमड़ पड़ता है, और सब हँसी-मजाक में एक-दूसरे के कारनामों का हिसाब-किताब निकालते हैं। सबकी आँखों में बस एक सवाल तैरता है—अगला अतिक्रमण का किंग कौन बनेगा?

अंत में, काला पंचायत का यह 'जमीन का खेल' कभी खत्म होने का नाम नहीं लेता। यह मनोरंजन का महोत्सव हर दिन नई कहानी लेकर आता है। और हम सब इस महाकुंभ का हिस्सा बनकर दिल से कहते हैं—खेलते रहो, भाई!

अस्वीकृति:
यह लेख पूरी तरह से मनोरंजन के लिए है और अतिक्रमण पर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी मात्र है। इसे गंभीरता से न लें और अवैध गतिविधियों से दूर रहें।


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