बिहार के जमुई जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, और यह समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। प्रमोद कुमार पाण्डेय, एक स्थानीय निवासी, ने प्रमंडलीय कार्यालय मुंगेर में धधरिया सिंचाई योजना के तहत मुख्य नाला से जुड़े द्वितीय नाले की सफाई और मरम्मत के लिए अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि इस नाले की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है—झाड़ियाँ, पेड़-पौधे और कूड़ा-करकट इस नाले में भर गए हैं, जबकि मिट्टी का स्तर भी सही नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे क्षेत्र के किसान भारी संकट में हैं।
इस मुद्दे पर प्रमोद कुमार पाण्डेय ने पहले भी जमुई जिले के लोक शिकायत कार्यालय में शिकायत दर्ज की थी। शिकायत संख्या 999880116082481579 के तहत, एक सुनवाई भी की गई थी, जिसमें जिला कार्यालय के प्रतिनिधियों ने पईन (नहर) की सफाई की आवश्यकता को स्वीकार किया था। हालांकि, इसके बावजूद कार्यवाही की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। पाण्डेय की नाराजगी स्पष्ट है, क्योंकि उन्हें यह महसूस हो रहा है कि जिलास्तरीय अधिकारियों की ओर से इस समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए, उन्होंने इस मामले को प्रमंडलीय कार्यालय मुंगेर में अपील संख्या 999880116082481579/1A के तहत फिर से उठाया है।
प्रमोद कुमार पाण्डेय का कहना है कि अगर नाले की सफाई और उचित लेवलिंग का कार्य शीघ्र नहीं किया गया, तो क्षेत्र के किसानों की स्थिति और भी दयनीय हो सकती है। इसलिए, उन्होंने प्रमंडलीय कार्यालय से एक निर्धारित तिथि और समय पर इस काम की शुरुआत करने की मांग की है, ताकि स्थानीय किसान भी इस काम की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित कर सकें कि सफाई का कार्य सही तरीके से किया जा रहा है।
यह मामला सिर्फ एक सिंचाई योजना का नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुका है, जो किसानों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करती है। प्रमंडलीय कार्यालय मुंगेर से अब त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है, ताकि जल संकट से जूझ रहे किसान अपनी खेती को फिर से समृद्ध बना सकें। यह सिर्फ एक शिकायत नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो न केवल किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय जल प्रबंधन व्यवस्था भी संकट में पड़ जाएगी।
आखिरकार, यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लें और इस दिशा में त्वरित और स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएं।
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