जमुई लक्ष्मीपुर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में 2023-2024 के बीच किसानों द्वारा पैक्स में बेचे गए धान के आंकड़े esahkari.bih.nic.in और मेरी पंचायत ऐप से लिए गए हैं। इस डेटा से स्पष्ट होता है कि "प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना" के तहत पंजीकृत किसानों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन उनमें से बहुत कम किसान ही पैक्स में अपना धान बेच रहे हैं।
गौरा पंचायत में कुल 5,352 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन केवल 13 किसानों ने पैक्स को अपना धान बेचा। इसी तरह, मोहनपुर पंचायत में 5,053 किसानों में से केवल 5 किसानों ने धान बेचा। पिड़रोन पंचायत में 2,286 किसानों में से 81 किसानों ने पैक्स तक धान पहुंचाया, जो अन्य पंचायतों की तुलना में अधिक है। चिनावरिया पंचायत में यह संख्या मात्र 7 है।
मरैया पंचायत में 3,066 किसानों में से केवल 3 किसानों ने पैक्स में धान बेचा। कला पंचायत में 2,534 किसानों में से 54 किसानों ने और अनंतपुर पंचायत में 3,295 पंजीकृत किसानों में से 14 किसानों ने अपने धान को पैक्स में बेचा।
यह आंकड़े बताते हैं कि किसानों और पैक्स के बीच काफी बड़ा अंतर है। कई किसानों का मानना है कि पैक्स में धान बेचने की प्रक्रिया कठिन और समय लेने वाली है। इसके अलावा, भुगतान में देरी भी एक प्रमुख कारण है। हालांकि, सरकार का कहना है कि पैक्स में धान बेचने के बाद, अधिकतम 48 घंटों के भीतर किसानों के खाते में भुगतान आ जाता है।
लेकिन जब मैंने किसानों से बातचीत की, तो उनकी शिकायतें कुछ और ही बताती हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स में धान बेचने के बाद उन्हें भुगतान में कई महीनों की देरी होती है। कुछ किसानों का तो कहना था कि उन्हें 2 से 4 महीनों बाद भुगतान मिलता है, जो उन्हें बहुत परेशान करता है। इस वजह से किसानों को कम दामों पर व्यापारी को अपना धान बेचना पड़ता है, क्योंकि व्यापारी तुरंत भुगतान करते हैं।
कई किसानों का मानना है कि पैक्स की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। वे महसूस करते हैं कि उनके धान की सही कीमत नहीं मिलती, और जो मूल्य मिलते हैं, वे बाजार मूल्य से बहुत कम होते हैं। पैक्स द्वारा भुगतान में इतनी देरी होने के कारण, वे मजबूर होकर व्यापारी से कम दामों पर अपना माल बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
इस स्थिति में सरकार को पैक्स की कार्यप्रणाली में सुधार करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और उनके बीच जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। पैक्स की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने से किसानों को फायदा होगा, और साथ ही उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सकेगा।
अस्वीकरण
यह ब्लॉग लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसमें दिए गए आंकड़े esahkari.bih.nic.in और मारी पंचायत ऐप से प्राप्त किए गए हैं। इन आंकड़ों और जानकारी का उद्देश्य किसानों के बीच पैक्स के माध्यम से धान बेचने की प्रक्रिया को समझाना और उसमें आ रही समस्याओं को उजागर करना है। यह लेख किसी सरकारी संस्था या संबंधित अधिकारियों की नीतियों का समर्थन या विरोध करने का प्रयास नहीं करता है।
किसानों की व्यक्तिगत राय और अनुभव इस लेख में शामिल किए गए हैं, जो उन्होंने अपनी बातचीत के दौरान साझा किए हैं। लेख में व्यक्त विचार और जानकारी लेखक के निजी अनुभवों और समझ पर आधारित हैं।
किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी या नवीनतम अपडेट के लिए संबंधित सरकारी विभागों और आधिकारिक वेबसाइट्स से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। लेखक इस ब्लॉग में दी गई जानकारी की सटीकता, पूर्णता या उपयोगिता के लिए जिम्मेदार नहीं है।
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