Friday, November 15, 2024

डाकघर स्टाफ की कमी: काला पंचायत की बड़ी समस्या।


काला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड, जमुई जिला, बिहार का वह इलाका है जो न केवल अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां के लोग अपनी मेहनत और आत्मनिर्भरता के लिए भी पहचाने जाते हैं। इस पंचायत में 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 5,000 लोग रहते थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर लगभग 10,000 हो चुकी होगा ! बढ़ती जनसंख्या और बदलते समय के साथ यहां की आवश्यकताएं भी बदल रही हैं, लेकिन डाक सेवाओं की स्थिति आज भी जस की तस है।

काला पंचायत का पिनकोड 811312 है, और यहां का डाकघर सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों और जरूरतों का केंद्र है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि पार्सल वितरण के लिए पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण, हमारी उम्मीदें अक्सर देर से पूरी होती हैं। सोचिए, जब किसी को अपने बच्चे की जन्मदिन की ड्रेस समय पर न मिले, या किसी छात्र को उसकी परीक्षा के लिए जरूरी किताबें समय पर न पहुंचे, तो क्या बीतती होगी?

यह डाकघर केवल काला पंचायत ही नहीं, आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए भी जरूरी सेवाएं प्रदान करता है। लेकिन पार्सल वितरण में हो रही देरी ने यहां के लोगों के दिल में निराशा पैदा कर दी है। हर बार जब हम अपने पार्सल का इंतजार करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हमारी जरूरतें और हमारी प्राथमिकताएं किसी के लिए मायने नहीं रखतीं।

रतन टाटा के शब्द यहां बेहद प्रासंगिक लगते हैं: "आकाश की ओर देखिए, हम वहां तक पहुंच सकते हैं, लेकिन पहले हमें अपने पैरों के नीचे की ज़मीन को मजबूत करना होगा।" हमारे लिए यह जमीन हमारा डाकघर है। यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारे गांव और शहरों को जोड़ने वाली एक डोर है।

मैं संबंधित विभागों और अधिकारियों से दिल से अपील करता हूं कि इस डाकघर में एक पूर्णकालिक पार्सल वितरण कर्मचारी की नियुक्ति करें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं होगी, यह हमारे सपनों को समय पर पूरा करने की शुरुआत होगी।

"हर चिट्ठी में सिर्फ शब्द नहीं होते, कुछ सपने भी होते हैं।"
आशा है कि यह छोटी-सी मांग हमारी बड़ी जरूरत को समझने में मदद करेगी और जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा।

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