लक्ष्मीपुर काला पंचायत धरधरिया पईन की समस्या किसानों के लिए दो वर्षों से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब यह मामला जिला लोकशिकायत कार्यालय पहुंचा, तो अतिक्रमण की बात सामने आई। इसके बाद लघु जल संसाधन विभाग, जमुई ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सीओओ, लक्ष्मीपुर को अतिक्रमण की जांच करने का निर्देश दिया।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बीडीओ को पईन की भूमि अधिग्रहण से संबंधित कोई कागजात नहीं दिए गए। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विभाग ने दूसरी पईन के टेंडर को गलत तरीके से पास कराया और सरकार को धोखे में रखा?
कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, जमुई के पत्रांक-2331, दिनांक 28.11.2024 के अनुसार, दूसरी पईन में ग्रामीणों द्वारा कचरा भर दिए जाने से पानी का प्रवाह रुक गया है। इसके लिए नया प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि अगर यह पईन पुराने टेंडर से बनी थी, तो इसे उसी टेंडर के तहत ठीक क्यों नहीं किया गया? क्या नया प्राक्कलन केवल किसानों को गुमराह करने और एक और बहाना बनाने का प्रयास है?
असल समस्या कचरा या अतिक्रमण नहीं है। असली दिक्कत यह है कि दोनों पईन के बीच लगभग दो फीट की ऊंचाई का अंतर है, जिसके कारण पानी का प्रवाह दूसरी पईन में नहीं हो सकता। यह विभाग की लापरवाही और खराब योजना का नतीजा है।
किसानों ने इस मुद्दे को लेकर कई बार आवाज उठाई है, लेकिन हर बार उन्हें गुमराह किया गया। अगली सुनवाई 13 दिसंबर 2024 को है, और किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उनके सवालों के जवाब मिलेंगे। इस लड़ाई में यह देखना जरूरी है कि क्या सरकार और विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या यह मामला केवल टेंडर, प्राक्कलन और बहानों के खेल तक सीमित रहेगा।
किसानों के लिए यह लड़ाई सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि उनके हक और अधिकारों की है।
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