Wednesday, August 21, 2024

श्मशान घाट से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में विनम्रता को अपनाएं

इस फोटो में एक श्मशान घाट का दृश्य दिख रहा है, जहां कई चिताएँ जल रही हैं। यह दृश्य जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक है, और यह हमें यह याद दिलाता है कि चाहे हम जीवन में कितने भी बड़े अहंकार में जी रहे हों, अंततः सब कुछ राख में बदल जाता है।

फोटो के ऊपर लिखा वाक्य "कई अहंकार राख में है, फिर भी मनुष्य अहंकार में है" हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन में जो चीज़ें हमें अहंकारी बनाती हैं, वे सब अंततः नष्ट हो जाती हैं। जीवन की असलियत यही है कि चाहे हमारा कितना भी बड़ा स्थान, दौलत, या प्रतिष्ठा हो, अंत में सब कुछ इस श्मशान की राख में ही मिल जाता है। फिर भी, मनुष्य अपने अहंकार को छोड़ने को तैयार नहीं होता। यह वाक्य हमें यह समझाता है कि मृत्यु की निश्चितता के बावजूद भी मनुष्य अहंकार से मुक्त नहीं हो पाता।

श्मशान घाट की इस तस्वीर में जलती हुई चिताएँ हमें यह भी याद दिलाती हैं कि जीवन का अंत निश्चित है, और यह भी कि मृत्यु के सामने सब बराबर होते हैं। यह एक ऐसा स्थान है जहां सभी भौतिक प्राप्तियां, सभी अहंकार, सभी महत्वाकांक्षाएं राख में मिल जाती हैं। 

इसलिए, हमें इस श्मशान घाट से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में विनम्रता को अपनाएं, क्योंकि अंत में हमारा अहंकार ही हमें हानि पहुँचाता है। जीवन को बेहतर बनाने के लिए अहंकार को त्याग कर, विनम्रता और परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए।

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