जमुई जिले के लगभग सभी प्रखंडों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ऑनलाइन उपस्थिति में गड़बड़ी की जा रही है। हमने कुछ प्रखंडों का डाटा देखा तो पाया कि हर मस्टररोल में वही वर्कर की फोटो दिखाई दे रही है और सभी मस्टररोल की तिथि और समय भी एक ही है। यह स्थिति इस योजना के दुरुपयोग की ओर स्पष्ट संकेत देती है।
जब हमने गहराई से जांच की, तो यह भी सामने आया कि कार्य स्थल अलग-अलग स्थानों पर होने के बावजूद, एक ही कार्यकर्ता की उपस्थिति दो जगहों पर एक ही समय और तिथि पर दर्ज की गई है। यह कैसे संभव है कि एक कार्यकर्ता एक ही समय पर दो अलग-अलग स्थानों पर उपस्थित हो?
इसके अलावा, मस्टररोल में 10 से अधिक लोगों के नाम दर्ज हैं, लेकिन फोटो में या तो कम लोग दिखाई दे रहे हैं या फिर अधिक। उदाहरण के लिए, आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं कि मस्टर रोल में 10 मजदूरों के नाम लिखे हुए हैं, लेकिन फोटो में केवल 6 लोग ही दिखाई दे रहे हैं। आप देख सकते हैं कि यह तस्वीर जमुई जिला के चकाई ब्लॉक
पंचायत, पेतारफरी का है। निर्माण के मस्टररोल नंबर 12684 में यह गड़बड़ी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उदाहरण 1:
ब्लॉक: चकाई
पंचायत: पेतारफरी
निर्माण के मस्टररोल नंबर: 12684 ,12685
दूसरी तस्वीर में, मस्टररोल नंबर 12685 में वही लोग दिखाई दे रहे हैं जो मस्टररोल नंबर 12684 में थे। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मनरेगा योजना में किस प्रकार से दुरुपयोग हो रहा है।
#मस्टररोल नंबर 12685
उदाहरण 2:
ब्लॉक: गिधौर
पंचायत: गुगुलदीह
मस्टररोल नंबर: 2193,2194
उदाहरण 3:
ब्लॉक: जमुई
पंचायत: दौलतपुर
मस्टररोल नंबर: 6968
फोटो में कोई भी मजदूर नहीं दिखता, लेकिन उपस्थिति में एक आदमी का नाम दर्ज है।
उदाहरण 4:
ब्लॉक: खैरा
पंचायत: कागेस्वर
फोटो में 5 लोग दिख रहे हैं, लेकिन उपस्थिति 10 लोगों की दर्ज की गई है।
उदाहरण 5:
ब्लॉक: सोनो
पंचायत: सोनो
मस्टररोल नंबर: 9241
सोनो ब्लॉक के सोना पंचायत में Msr No. 9241 में 10 लोगों का अटेंडेंस दर्ज किया गया है, लेकिन फोटो में एक भी मजदूर नहीं दिख रहा। अगर आप भी इन छुपे हुए मजदूरों को देखना चाहते हैं, तो आपको 'मिस्टर इंडिया' फिल्म में अनिल कपूर द्वारा पहना गया जादुई चश्मा लगाना पड़ेगा! शायद वे तस्वीरों में छुपे हुए हैं और बिना चश्मे के देखने पर वे नज़र ही नहीं आते।यह हाल देखकर तो लगता है कि यह मस्टररोल ही किसी जादू की किताब से निकल आया है। क्या पता ये मजदूर भी काले घोड़े पर सवार होकर काम करने आए हों और फोटो खिंचवाना भूल गए हों।अगर सरकार को इन छुपे हुए मजदूरों का पता लगाना है, तो उन्हें भी अनिल कपूर की तरह अदृश्यता की तकनीक का सहारा लेना पड़ सकता है!
यह सभी उपस्थिति एनएमएमएस (NMMS) ऐप के माध्यम से दर्ज की गई हैं, जो मनरेगा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रिकॉर्ड करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। लेकिन इसके वर्तमान उपयोग से लगता है कि यह ऐप पारदर्शिता के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।
हमने इस ब्लॉग के अंत में कुछ उद्धरण और तस्वीरें जोड़ी हैं, जो इस योजना में हो रही अनियमितताओं को उजागर करते हैं। यह आवश्यक है कि इस तरह की गड़बड़ियों की जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का सही और प्रभावी तरीके से संचालन हो सके।
अस्वीकृति: मैंने यह सभी डेटा मनरेगा पोर्टल से प्राप्त किया है। यदि किसी भी जानकारी में त्रुटि हो, कृपया पोर्टल की जांच करें।
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