Saturday, August 17, 2024

ब्लॉग शीर्षक: उपभोक्ता की शिकायत पर विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही और उसके दावे की अस्वीकृति


बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत सहदेव प्रसाद यादव, ग्राम काला, प्रखंड लक्ष्मीपुर, जिला जमुई के निवासी, ने दिनांक 06.06.2024 को एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में सहदेव प्रसाद यादव ने दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) के कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उनकी लापरवाही के कारण उनके धान का पुआल और आम के पेड़ जलकर खाक हो गए। उनका दावा था कि यह घटना दिनांक 02.06.2024 को हुई जब उनके घर के पास विद्युत मरम्मती कार्य चल रहा था। इस आगजनी में उनके लगभग 40 हजार रुपये मूल्य के धान का पुआल और 5 लाख रुपये मूल्य के दो आम के पेड़ जल गए।

 शिकायत और सुनवाई की प्रक्रिया

शिकायत दर्ज होने के बाद लोक प्राधिकार- सह- सहायक विद्युत अभियंता, विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल, गिद्धौर को नोटिस जारी की गई। शिकायत की सुनवाई के लिए कई तारीखें निर्धारित की गईं, जिनमें 28.06.2024 से 02.08.2024 तक की तिथियाँ शामिल थीं। इस दौरान दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।

विद्युत विभाग का प्रतिवेदन और निष्कर्ष

विद्युत विभाग के कनीय अभियंता द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि घटना के समय विद्युत आपूर्ति पूर्णतः बंद थी और विद्युत कर्मी पोल पर चढ़कर मरम्मती कार्य कर रहे थे। विभाग का दावा था कि आगजनी की घटना विद्युत आपूर्ति से नहीं हुई। इस प्रतिवेदन के आधार पर, लोक प्राधिकार ने सहदेव प्रसाद यादव के मुआवजे के दावे को अस्वीकार कर दिया और मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी।

उपभोक्ताओं के अधिकार और विद्युत विभाग की जवाबदेही

यह मामला केवल सहदेव प्रसाद यादव का नहीं है, बल्कि यह हर उस उपभोक्ता का है जो विद्युत विभाग की लापरवाही से प्रभावित हो सकता है। बिहार इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के मानकों के अनुसार, विद्युत वितरण कंपनी को निर्धारित समय पर उपभोक्ताओं को सूचित करना चाहिए यदि किसी कारण से बिजली की आपूर्ति बंद की जाती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या SBPDCL ने इस मानक का पालन किया?
भारतीय विद्युत नियामक आयोग (Regulation of Performance Standards of Distribution Licensee) मानक:

अगर विद्युत मरम्मती कार्य के दौरान बिजली पूरी तरह से बंद थी, जैसा कि विभाग दावा कर रहा है, तो उपभोक्ता को इसकी जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई? क्या विभाग ने किसी प्रकार की सूचना, नोटिस, एसएमएस, या अन्य माध्यम से उपभोक्ताओं को सूचित किया था?

उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता

इस प्रकार की घटनाएं उपभोक्ता अधिकारों की उपेक्षा की ओर संकेत करती हैं। अगर विभाग ने सही समय पर और उचित तरीके से सूचना दी होती, तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था। यह जरूरी है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और ऐसे मामलों में विभाग से साक्ष्य की मांग करें। 

विद्युत वितरण कंपनी को उपभोक्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होने की आवश्यकता है। अगर किसी उपभोक्ता को सही सूचना नहीं दी जाती, तो उन्हें शिकायत दर्ज कर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

निष्कर्ष: सहदेव प्रसाद यादव के मामले में SBPDCL की लापरवाही स्पष्ट है, और यह आवश्यक है कि विभाग अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करे और उपभोक्ताओं को समय पर और उचित सूचना देने के लिए प्रतिबद्ध रहे।

No comments: