Sunday, August 18, 2024

महाभारत में ऐसा एक उदाहरण कौरवों और पांडवों के बीच का है

महाभारत में ऐसा एक उदाहरण कौरवों और पांडवों के बीच का है। कौरवों और पांडवों दोनों धृतराष्ट्र और पांडु के पुत्र थे, जो भाई थे। कौरवों का नेता दुर्योधन था और पांडवों का नेता युधिष्ठिर था। दोनों पक्षों के बीच गहरी दुश्मनी थी, खासकर दुर्योधन और भीम के बीच। यह दुश्मनी इतनी गहरी थी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे का खून बहाने के लिए तत्पर थे।

दुर्योधन पांडवों से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नहीं रखना चाहता था और उसने उन्हें खत्म करने के कई प्रयास किए। पांडवों ने भी अंततः महाभारत युद्ध में कौरवों के खिलाफ हथियार उठाए। 

इस दुश्मनी का कारण दुर्योधन की पांडवों के प्रति जलन और अधिकार की भावना थी। पांडवों को अपने अधिकारों और धर्म की रक्षा के लिए युद्ध में उतरना पड़ा। 

महाभारत के युद्ध के बाद, कौरवों का विनाश हो गया और केवल पांडव ही बचे। इस दुश्मनी के अंत में, युद्ध के बाद कोई सुलह या मेल-मिलाप नहीं हुआ, क्योंकि कौरवों का कुल नाश हो चुका था।

इसलिए, इस मामले में रिश्ते कभी भी ठीक नहीं हुए और यह दुश्मनी अंत तक बनी रही।

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