15 अगस्त, हमारे देश का वो दिन जब हर भारतीय का दिल देशभक्ति से भर जाता है। तिरंगे की शान में, "जय जवान, जय किसान" का नारा गूंजता है, और हम अपनी आज़ादी का जश्न मनाते हैं। लेकिन इस गर्व और उल्लास के बीच, काला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड, जमुई जिला, बिहार के किसानों के दिल में दर्द और मायूसी का साया छाया हुआ है।
हमारा देश आज़ादी के 77 साल पूरे कर रहा है, लेकिन हमारे किसान अभी भी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। धरधररिया नदी पर करोड़ों रुपये खर्च कर डैम बनाया गया, ताकि किसानों को पानी की किल्लत से निजात मिल सके। परंतु, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार जमुई की लापरवाही के चलते, यह सपना अभी भी अधूरा है। एक नहर का पानी तो अपने लक्ष्य तक पहुंच रहा है, लेकिन दूसरी नहर से पानी की बूँदें भी नहीं पहुंच पा रही हैं।
क्या इस 15 अगस्त को, जब पूरे देश में तिरंगा फहराया जाएगा और हर जगह "जय जवान, जय किसान" का नारा गूंजेगा, हमारे काला पंचायत के किसान भी गर्व से कह पाएंगे कि वे स्वतंत्र हैं? या फिर वे उस जल संकट के चलते मायूस होकर तिरंगे की तरफ देखेंगे, जिसकी वजह से उनके खेत सूखे पड़े हैं?
आज, जब देश के नेता और अधिकारी आज़ादी का जश्न मनाने में व्यस्त हैं, काला पंचायत के किसान सोच रहे हैं कि क्या उनकी समस्या का समाधान इस आज़ादी के दिन होगा। चार साल पहले शुरू हुई यह योजना, जिसका उद्देश्य किसानों को जल संकट से बचाना था, अब सिर्फ एक अधूरा सपना बनकर रह गई है।
किसान अपने खून-पसीने से इस देश की भूमि को सींचते हैं, लेकिन जब उन्हें अपने ही खेतों के लिए पानी नहीं मिलता, तो यह उनके साथ अन्याय है। हमारे मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने "जल जीवन हरियाली" जैसी महत्वाकांक्षी योजना शुरू की, लेकिन जब तक लघु जल संसाधन विभाग जमुई के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक यह योजना केवल कागज़ों पर ही सिमट कर रह जाएगी।
15 अगस्त का दिन हमें हमारे स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। उन बलिदानों की, जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाई। लेकिन क्या यह सही मायने में आज़ादी है, जब हमारे किसान आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं? क्या यह आज़ादी का सही अर्थ है, जब हमारे खेत सूखे पड़े हैं और किसान अपने बच्चों का पेट भरने के लिए जूझ रहे हैं?
आज का दिन हमें एक और मौका देता है सोचने का, कि क्या हम सही दिशा में हैं? क्या हम वास्तव में "जय जवान, जय किसान" के नारे को जीवित रख रहे हैं? हमें उम्मीद है कि इस 15 अगस्त पर, हमारी सरकार और अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और किसानों की समस्या का समाधान करेंगे।
क्योंकि जब तक हमारे किसान खुशहाल नहीं होंगे, तब तक हमारी आज़ादी अधूरी है। और तब तक हमारा तिरंगा पूरी शान से नहीं लहरा सकता।
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