जमुई जिले का प्रशासन भले ही जीरो टॉलरेंस पर काम करने का दावा कर रहा हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मानसून के इस महत्वपूर्ण समय में, जब पशुओं की सुरक्षा के लिए टीकाकरण जरूरी है, हमारे काला पंचायत, लक्ष्मीपुर, जमुई, बिहार में अब तक किसी भी पशु को टीका नहीं लगाया गया है। यह स्थिति न केवल हमारे पशुओं के लिए, बल्कि पूरे इलाके के स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा है।
टीकाकरण का महत्व और प्रशासन की उदासीनता
मानसून का मौसम पशुओं के लिए कई बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें से कुछ बेहद खतरनाक होती हैं। खुरपका-मुँहपका, हेमोरेजिक सेप्टिसीमिया, ब्लैक क्वार्टर, और ब्रूसेलोसिस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण अनिवार्य है। सरकार ने इन बीमारियों से लड़ने के लिए टीकाकरण का इंतजाम किया है, लेकिन दुर्भाग्य से, हमारे पंचायत में इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत
हाल के दिनों में, समाचार पत्रों में जमुई जिला प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति की खबरें आई हैं। लेकिन हकीकत में, यह नीति केवल कागजों पर ही दिखाई दे रही है। काला पंचायत में अब तक कोई भी सरकारी पशु चिकित्सक नहीं आया है, और हमारे मवेशियों का टीकाकरण नहीं हो पाया है। जैसे-जैसे मानसून का आखिरी दौर चल रहा है, हमें डर है कि हमारे मवेशी बीमार हो जाएंगे और उनकी मौत हो सकती है। इसके बाद, उनकी मृत देह को लोग सुनसान जगहों पर फेंक देंगे, जिससे आवारा कुत्तों के पागल होने और फिर इंसानों पर हमला करने का खतरा बढ़ जाएगा। एक छोटी सी लापरवाही पूरे समुदाय के लिए बड़ा संकट बन सकती है।
पशुपालन विभाग जमुई से अपील
इस स्थिति को देखते हुए, जिला पशुपालन विभाग से मेरा अनुरोध है कि काला पंचायत में टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए। टीकाकरण से न केवल हमारे मवेशियों की जान बचेगी, बल्कि पूरे इलाके का पर्यावरण और स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा।
सभी पशुपालकों से भी मेरी अपील है कि वे इस मुद्दे पर जागरूक रहें और अपने मवेशियों का टीकाकरण जरूर करवाएं। सही समय पर लगाए गए टीके ही हमारे पशुओं को सुरक्षित और स्वस्थ रख सकते हैं।
जय जवान, जय किसान।
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