काला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड, जमुई जिला, बिहार—जहां एक तरफ पूरा देश आज़ादी के अमृत महोत्सव में देशभक्ति और विकास की नई ऊंचाइयों को छूने की बात कर रहा है, वहीं काला पंचायत के किसान आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। धारदरिया डेम से जुड़ी नहरें किसानों के लिए उम्मीद की किरण थीं, लेकिन लघु जल विभाग जमुई की लापरवाही ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
किसानों का धैर्य अब टूटता नजर आ रहा है। जहां उन्हें नहरों से आने वाले पानी का भरोसा था, अब वे भगवान की ओर देख रहे हैं। आज, जमुई जिले में भारी बारिश हो रही है, और यही बारिश अब किसानों के लिए जीवनदायिनी बन रही है। बची हुई धान की खेती को ये बारिश बचा सकती है, लेकिन यह स्थिति दर्शाती है कि लापरवाह अधिकारियों के भरोसे किसान नहीं रह सकते।
लघु जल विभाग जमुई के अधिकारियों की लापरवाही ने काला पंचायत के किसानों के दिलों में गहरी निराशा भर दी है। आज, किसानों का भरोसा इन अधिकारियों से उठ चुका है, और वे खुद को प्रकृति और भगवान के सहारे छोड़ने को मजबूर हैं। बारिश के इन दिनों में, किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जो भी बची हुई फसल है, उसे ये बारिश सहारा देगी।
आज, काला पंचायत के किसान इस आज़ादी के महोत्सव के दौरान सोचते हैं कि क्या यही है आज़ादी, जहां वे अपने खेतों में पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं? इस संघर्ष में, उन्हें अब लघु जल विभाग बिहार जमुई के भरोसे नहीं, बल्कि बारिश की बूंदों और भगवान की कृपा पर यकीन है।
**धरधरिया डेम और नहरें** जो कभी किसानों के लिए जीवनदायिनी बननी थीं, आज सिर्फ एक अधूरी उम्मीद बनकर रह गई हैं। किसानों के लिए अब समय आ गया है कि वे अपनी ताकत और दृढ़ता को पहचानें और अपने भविष्य के लिए खुद कदम उठाएं।
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