जमुई, बिहार में इन दिनों अवैध बालू (रेत) माफिया का बोलबाला है. सरकारी नियमों को ताक पर रखकर हो रहे इस अवैध खनन से न सिर्फ पर्यावरण को खतरा है बल्कि आम लोगों की जान भी जोखिम में है.
- बढ़ती कीमतें, मजबूर खरीदार:
स्थानीय सूत्रों की मानें तो सरकारी आपूर्ति ठप होने की वजह से बालू माफिया मनमानी कर रहे हैं. एक-दो ट्रैक्टर बालू मिलना भी मुश्किल है और मिल भी जाए तो उसकी कीमत आसमान छू रही है. खबरों के अनुसार, फिलहाल अवैध रूप से निकाले गए बालू की कीमत करीब 4 हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर है. मजबूरन निर्माण कार्य कराने वाले लोग इतनी ऊंची कीमत पर भी बालू खरीदने को बाध्य हो रहे हैं.
- तेज़ रफ्तार, हादसों का सिलसिला:
चूंकि बालू का अवैध खनन और परिवहन है, इसलिए ट्रैक्टर चालक पुलिस से बचने के लिए काफी तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहे हैं. यह न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का सबब बन रहा है बल्कि लोगों की जान भी ले रहा है. पिछले दो दिनों में ही तेज रफ्तार से चल रहे बालू लदे ट्रैक्टरों की वजह से 2 लोगों की मौत की खबरें आई हैं.
- कब रुकेगा ये खेल?
जमुई में हो रहे अवैध बालू खनन पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है. प्रशासन को इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही, वैध स्रोतों से बालू की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आम लोगों को माफिया के चंगुल से छुटकारा मिल सके.
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