Monday, May 20, 2024

फूलन देवी: दस्यु रानी से सांसद तक का सफर


फूलन देवी नाम भारत के इतिहास में एक विवादित और जटिल शख्सियत के रूप में दर्ज है। दस्यु रानी के नाम से कुख्यात फूलन देवी बाद में राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा और सांसद बनीं। उनका जीवन सामाजिक विषमताओं, अपराध और सत्ता के जाल का एक ज्वलंत उदाहरण है।

विपरीत परिस्थितियों में जन्म

फूलन देवी का जन्म 1963 में उत्तर प्रदेश के गोरहा का पुरवा गांव में एक गरीब मल्लाह परिवार में हुआ था। उस समय की भारतीय सामाजिक व्यवस्था में उनकी जाति सबसे निचले पायदान पर थी। गरीबी और दमन उनका बचपन का परिचित था।

बाल विवाह और अत्याचार

मात्र 11 साल की उम्र में ही उनका विवाह एक उम्रदराज व्यक्ति से कर दिया गया। इसके बाद उनकी जिंदगी में दुखों का सिलसिला शुरू हुआ। ससुराल में उन्हें तरह-तरह के अत्याचार सहने पड़े। कुछ समय बाद वह अपने पिता के पास वापस लौटीं, मगर वहां भी उनकी दशा नहीं सुधरी।

डाकुओं के गिरोह में शामिल होना

भाग्य विपरीत होने के कारण फूलन देवी को मजबूरन डाकुओं के एक गिरोह में शामिल होना पड़ा। गिरोह के सरगना मन्मथ सिंह द्वारा उनका अपहरण कर लिया गया और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। बाद में मन्मथ सिंह की मौत के बाद फूल विक्रम सिंह नाम के डाकु के साथ उनकी शादी हुई। विक्रम सिंह की मौत के बाद फूलन देवी ने खुद गिरोह की कमान संभाली।

कुख्याति और आत्मसमर्पण

फूलन देवी के गिरोह ने कई दबंगों और ऊंची जाति के लोगों को निशाना बनाया। 1981 में Behmai गांव में हुई एक घटना ने उन्हें कुख्याति दिला दी। इस घटना में उनके गिरोह के सदस्यों ने 22 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद फूलन देवी भारत की सबसे खतरناک डाकुओं में से एक मानी जाने लगीं। 1983 में उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

जेल से संसद तक का सफर

ग्यारह साल जेल में रहने के बाद 1994 में फूलन देवी रिहा हुईं। रिहाई के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। 1996 में वह मिर्जापुर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं।

विवादों और हत्या

फूलन देवी का जीवनकाल विवादों से भरा रहा। राजनीति में आने के बाद भी उनका विवादास्पद अतीत उनका पीछा नहीं छोड़ा। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।

फूलन देवी की कहानी: एक जटिल विरासत

फूलन देवी की कहानी सामाजिक और जातिगत असमानता, महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार और जटिल परिस्थितियों में लिए गए फैसलों की जटिलता को उजागर करती है। उनकी कहानी पर कई फिल्में और किताबें लिखी गईं। फूलन देवी की जिंदगी पर बहस जारी है कि उन्हें दस्यु कहा जाए या उन्हें सामाजिक परिस्थितियों का शिकार माना जाए।

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