मनरेगा योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा करना और गरीबी कम करना है, अक्सर भ्रष्टाचार की चपेट में आ जाती है। जमुई जिले में भी मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी के कई मामले सामने आ रहे हैं।
अधूरे तालाब और फर्जी निर्माण:
मनरेगा पोर्टल पर दर्ज कई तालाब निर्माण योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इन तालाबों की खुदाई का काम सिर्फ 30% ही पूरा हुआ है। मानसून आने से पहले अगर ये तालाब पूरे नहीं होते हैं, तो भ्रष्टाचार का फिर से खेल शुरू हो जाएगा।
लक्ष्य बना गहराई:
मनरेगा योजना में कई बार लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता है। तालाबों की गहराई 6 से 7 फीट निर्धारित की जाती है, लेकिन कई बार सिर्फ खानापूर्ति के लिए ऊपर-ऊपर से खुदाई कर दी जाती है।
शिकायतों का झमेला:
अगर कोई ग्रामीण अधूरे तालाब या फर्जी निर्माण की शिकायत करता है, तो मनरेगा विभाग अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि "काम पूरा नहीं हुआ है।" मानसून के बाद अगर तेज बारिश से तालाब की दीवार टूट जाती है, तो विभाग कहता है कि "ज्यादा बारिश के कारण दीवार टूट गई।"
मनरेगा बोर्ड गायब!
कई निर्माण स्थलों पर निर्धारित समय तक मनरेगा योजना की सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को योजना की जानकारी नहीं मिल पाती है और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ जाती है।
क्या राणा उठाएंगे कदम?
राणा, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए जाने जाते हैं, क्या वे मनरेगा में हो रही इन गड़बड़ियों की शिकायत लोकपाल में دوباره (dobara) दर्ज कराएंगे? यह देखना होगा।
पाठकों के लिए संदेश:
- मनरेगा योजनाओं की निगरानी करना हमारा कर्तव्य है।
- अगर आपको मनरेगा योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी दिखती है, तो इसकी शिकायत करें।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं।
आप अपने आस-पास हो रहे मनरेगा योजनाओं की निगरानी कैसे कर सकते हैं?
- आप मनरेगा पोर्टल पर जाकर अपनी ग्राम पंचायत की योजनाओं की जानकारी देख सकते हैं।
- आप निर्माण स्थल पर जाकर वहां लगे सूचना बोर्ड से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- आप ग्राम सभाओं में भाग लेकर योजनाओं पर चर्चा कर सकते हैं।
हम सब मिलकर मनरेगा योजनाओं में पारदर्शिता ला सकते हैं।
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