पिछले भाग में:
- राना ने ओमप्रकाश का विरोध करने का फैसला किया।
- राना मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं पर लोकयुक्त आयोजित करने की तैयारी में है।
- राना की इस रणनीति से उन लोगों के बीच विश्वास कम हो रहा है जो पहले उस पर भरोसा करते थे।
- डॉक्टर हाहा जी और रबी इस स्थिति से खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि राना के विरोध से ओमप्रकाश कमजोर पड़ेगा।
इस भाग में:
- ओमप्रकाश राणा के विरोध को चतुराई से संभाल लेते हैं।
- मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद, ओमप्रकाश चुनाव में मजबूत स्थिति में हैं।
- रबी और डॉक्टर हाहा जी ओमप्रकाश के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से डरते हैं।
- रबी का राजनीतिक करियर खतरे में है।
ओमप्रकाश की चतुराई:
जैसे ही राना ओमप्रकाश का विरोध करने का प्रयास करता है, ओमप्रकाश चतुराई से दरवाजे के पीछे समझौता कर लेते हैं। वे राना के समर्थकों को रिश्वत देते हैं और उन्हें अपनी तरफ कर लेते हैं।
मनरेगा में भ्रष्टाचार:
हाल ही में, मनरेगा के माध्यम से आहार बनाने के लिए बांध काटने का एक मामला सामने आया है। राना ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डॉक्टर हाहा जी और रबी का डर:
रबी और डॉक्टर हाहा जी ओमप्रकाश के खिलाफ बोलने से डरते हैं। उन्हें पता है कि ओमप्रकाश बहुत शक्तिशाली हैं और वे उनका विरोध नहीं कर सकते।
रबी का डूबना:
रबी का राजनीतिक करियर खतरे में है। ओमप्रकाश के खिलाफ बोलने के कारण, रबी ने कई मतदाताओं का समर्थन खो दिया है।
यह कहानी अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में कई रोमांचक मोड़ देखने को मिल सकते हैं।
पाठकों के लिए संदेश:
- राजनीति में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है।
- हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने से नहीं डरना चाहिए।
- हमें अपने नेताओं का चुनाव करते समय सावधान रहना चाहिए।
यह कहानी केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें कोई वास्तविक घटना या व्यक्ति शामिल नहीं है।
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