Sunday, January 7, 2024

जमीन, नालियों, और लड़ाई: काला ग्राम की सफल साफ-सफाई यात्रा


 काला ग्राम पंचायत में रहते-रहते प्रमोद पांडे को लगता रहा कि गांव में नालियों की कमी बड़ी मुसीबत है. गंदा पानी इकट्ठा हो जाता, मच्छर पनपते, बीमारियां फैलती. सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए प्रमोद ने पंचायती राज में शिकायत लिखी.

24 मार्च 2023 को मंत्रालय ने इस मामले को सेवा विभाग को भेजा. महीनों बीत गए, पर सुधार नहीं हुआ. तब 7 जनवरी 2024 को मुखिया, श्री रणधीर यादव, आगे आए. उन्होंने पंचायत के कई लोगों - बबन पांडे, संजय पांडे, मिथलेश सिंह, विभूति पांडे, कपिलदेव पांडे, रंजित पांडे - के साथ बैठक की. क्या करना है, समझने की कोशिश हुई.

सबसे बड़ी अड़चन एक जमीन का झगड़ा था. वो शख्स कहता था यह मेरी है, जबकि गांव के लोग मानते थे ये सबकी जमीन है. नाली बनाने के लिए इसी जमीन की जरूरत थी. मुखिया रणधीर यादव ने दोनों पक्षों से बात की.

शख्स अपनी जिद पर अड़ा रहा, पर गांव वाले कह रहे थे कि ये जमीन नाली के लिए जरूरी है. तब मुखिया जी को लगा कि जमीन की हकीकत जानने के लिए सर्वे करवाना चाहिए. राजस्व कर्मचारी या जमीन सर्वेक्षक से बात हुई, कि वो पता लगाएं आखिर सच क्या है.

सर्वे से उम्मीद है कि जमीन का सवाल और नाली का मुद्दा दोनों सुलझ जाएंगे. साफ पानी, नालियां, साफ-सफाई - यही तो सब चाहते हैं. प्रमोद पांडे की शिकायत ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है. गांव वाले एकसाथ आए, सरकार ने ध्यान दिया, उम्मीद है अब कला ग्राम पंचायत का भविष्य साफ सुथरा होगा.

ये कहानी सिर्फ लड़ाई की नहीं है, ये बेहतर जिंदगी की उम्मीद की भी कहानी है. वो जज्बा, वो साथ, जिससे हर जगह बदलाव आ सकता है.

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