जमुई, बिहार: जमुई के काला पंचायत की प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (पैक्स) में इन दिनों बवाल मचा हुआ है. दरअसल, कई किसान अपने धान बेचने के बाद भी पैसा पाने के लिए तरस रहे हैं. वजह ये है कि पैक्स में उनके बायोमेट्रिक सत्यापन में अचानक देरी हो गई है.
तीन से पांच दिन पहले ही धान दे देने के बावजूद, पैक्स ने अब तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है. इससे नाराज किसानों का कहना है कि पैसा न मिलने से उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई है. कृषि ही उनकी रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है और पैक्स में फंसे उनके हक के रुपये ना मिलने से उनका गुजर-बसर मुश्किल हो गया है.
इस बात की जानकारी एक गुमनाम किसान ने दी है. उन्होंने चिंता जताई है कि कई किसान पैक्स से डर के कारण सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनकी हालत भी ऐसी ही खराब है.
किसानों की इस परेशानी को देखते हुए अब जरूरी है कि बिहार सरकार के सहकारी समितियों को देखने वाले विभाग इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करें.
पैक्स में सत्यापन में देरी क्यों हो रही है, इसकी जांच होनी चाहिए. सीसीटीवी फुटेज और गोदाम का भी निरीक्षण करवाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि आखिर में पेमेंट में देरी की असली वजह क्या है.
किसानों का हित बचाना सरकार का फर्ज है. इसलिए यह जरूरी है कि पैक्स में पारदर्शिता और समय पर भुगतान का सिस्टम ठीक से चले. इससे किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा और वो खेती के काम में मन लगाकर कर सकेंगे.
अभी ये तो सिर्फ एक उदाहरण है, ऐसे तमाम मामले ग्रामीण इलाकों में होते रहते हैं. सरकार को चाहिए कि इन सहकारी समितियों की नियमित रूप से जांच करवाए और किसानों के हितों की रक्षा करे. तभी हमारे देश का किसान खुशहाल हो सकता है और देश तरक्की कर सकता है.
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