Wednesday, July 17, 2024

"पापा, मैं CA बन गयी!" - 10 साल की मेहनत रंग लाई!


"पापा, मैं CA बन गयी!" - 10 साल की मेहनत रंग लाई!

आँखों में सपना लिए हर रोज़ खुद से पूछती थी ये सपना ही है या कभी सच भी होगा...

11 जुलाई 2024, आज सच हो गया... हाँ सपने सच होते हैं! लोग कहते थे "क्यूँ कर रही हो इतना बड़ा कोर्स, तुम्हारी बेटी नहीं कर पाएगी, क्योंकि मैं Below Average Student थी.."।

कहते थे "तुम इतना नहीं पढ़ पाओगी, चाय बेचकर, पैसा बचाकर घर बना लो, कब तक जवान बेटियों को लेकर सड़क पे रहोगे, वैसे भी एक दिन तो इनहे जाना ही है पराया धन है, तुम्हारे पास कुछ नहीं बचेगा..."

हाँ, मैं "Slum" में रहती हूँ (ये बहुत कम लोग ही जानते हैं), लेकिन अब मुझे कोई शर्म नहीं!

वो कुछ लोग कहते थे "जुग्गी झोपड़ी, उल्टी-खोपड़ी" - सच कहूँ तो, बिलकुल सही कहते थे, अगर उल्टी-खोपड़ी नहीं होती तो आज यहाँ नहीं पहुंचती... और अब इस लायक हूँ कि अपने पापा को घर बनवा के दे सकती हूँ, उनकी सारी ख्वाहिशें पूरी कर सकती हूँ...

पहली बार पापा को गले लगाकर रोई, ये सुकून है... इस मोमेंट के लिए बहुत-बहुत ज़्यादा वेट किया था, खुली आँखों से इस सपने को imagine करती थी, आज captured है Real में!

मैं सबको यही कहना चाहूँगी - "It's never too late" और सपने सच होते हैं! 700

आज जो भी कुछ मेरे Papa और Mummy की देन है, जो मुझपे इतना विश्वास किया और कभी ये नहीं सोचा कि एक दिन उन्हें छोड़कर चली जाऊँगी, बल्कि ये सोचा कि "मैं अपनी बेटियों को पढ़ाऊंगा।"

यह कहानी उन सभी के लिए बहुत खास और प्रेरणादायक है जो लैंगिक समानता में विश्वास रखते हैं।

इस कहानी से हमें प्रेरणा मिलती है:

  • मेहनत और लगन से सपने ज़रूर पूरे होते हैं।

  • गरीबी या परिस्थितियों को सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

  • लड़कियों को भी शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने का समान अवसर मिलना चाहिए।

  • माता-पिता का प्यार और विश्वास बच्चों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस कहानी से जेंडर भेदभाव रखने वालों को भी सीख मिलती है कि प्रतिभा किसी लिंग पर निर्भर नहीं करती। कड़ी मेहनत और लगन से हर कोई अपने सपने पूरे कर सकता है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चे प्रयासों और दृढ़ संकल्प से हम अपनी किस्मत बदल सकते हैं और समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं।

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