परिचय:
हर साल सावन के महीने में, जब मैं अपने बड़े चाचा को सुल्तानगंज से बैद्यनाथ धाम की ओर कदम बढ़ाते देखता हूं, तो मेरा मन गर्व से भर जाता है। 50 के पार की उम्र में भी उनकी उर्जा और भगवान शिव के प्रति समर्पण देखकर मैं हैरान रह जाता हूं।
शरीर:
बचपन से प्रेरणा: बचपन से ही मैं अपने बड़े चाचा को कांवड़ यात्रा पर जाते देख रहा हूं। उनके दोस्तों के साथ ये यात्रा उनके जीवन का एक अहम हिस्सा रही है।
अटूट मित्रता और विश्वास: उनके कुछ दोस्त अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन पिताजी आज भी उसी जोश और उत्साह के साथ यात्रा पर जाते हैं। ये दर्शाता है कि मित्रता का बंधन कितना मजबूत होता है।
कठिन यात्रा: 130 किलोमीटर की पैदल यात्रा कोई मामूली बात नहीं होती। फिर भी, पिताजी हर साल इस यात्रा को पूरा करते हैं। ये उनकी शारीरिक और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।
भगवान शिव के प्रति समर्पण: पिताजी की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा देखकर मैं हमेशा प्रेरित होता हूं। उनके लिए ये यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनके प्यार का प्रमाण है।
सावन का महीना और इसका महत्व: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है।
निष्कर्ष:
मेरे बड़े चाचा मेरे लिए हमेशा एक प्रेरणा रहे हैं। उनकी इस यात्रा से मैंने बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने मुझे सिखाया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और अगर मन में कुछ करने की ठान ली जाए तो कोई भी मुश्किल काम आसान हो जाता है।
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